संविधान दिवस के उपलक्ष में जिले में बुधवार को संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को याद किया। जिला मुख्यालय पर भी अंबेडकर सर्किल स्थित बाबा साहब प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर बाबा साहब को याद किया। इस मौके पर भीमसेना से जुड़े अशोक बैरवा, पप्पू वाल्मीकि भीमसेना शहर अध्यक्ष, राजेश पारुचिया प्रदेश संयोजक वाल्मीकि महापंचायत, महावीर राजोरिया, छोटू लाल चंदेल, रमेश बोयत, रामबाबू बोयत, घनश्याम गोयल, अशोक चेटवाल, मंगल, बताया कि बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में 26 नवंबर 1949 को संविधान को संविधान सभा में पेश किया था। बोले- अपने हितों को देख रहे उन्होंने 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा की अंतिम बैठक में समापन भाषण दिया था और अंतिम मसौदे को प्रस्तुत किया और लागू हुआ। उनका यह योगदान आज हर जरूरतमंद को उसके अधिकार देता है। भीम सेना से जुड़े अशोक बैरवा कहा कि बाबा साहब ने जो ज्ञान का दीपक शिक्षित समाज को दिया था वह शिक्षित समाज अपने स्वार्थ को लेकर बैठा है, जिसके कारण समाज वर्गीकरण का शिकार हो चुका है । कर्मचारी अधिकारी संगठन इसलिए है कि वह अपने हितों को देखते हैं। संविधान लोकतंत्र की आत्मा है भीमसेना ने कहा कि संविधान लोकतंत्र की आत्मा है और देश को एकजुट रखता है। संविधान सर्वोच्च है। भारत का शासन संविधान और कानून के अनुसार चलता है न कि किसी व्यक्ति या सत्ता की मनमानी से चलता है। एकजुटता का प्रतीक संविधान ने चुनौतियों के समय भी भारत को एकजुट रखा है। न्याय के प्रति निष्ठा है संविधान के प्रति देश के बहुजन समाज को वह कर्मचारियों अधिकारियों को अपनी निष्ठा बनाए रखने की कोशिश करे और हर पद को सेवा का अवसर मानकर निचले पायदान पर बैठे बहुजन समाज की सेवा करें तभी संविधान की आत्मा में जान आएगी।


