छत्तीसगढ़ टीचर एसोसिएशन की ब्लॉक इकाई शंकरगढ़ ने सोमवार को संविलियन पूर्व सेवा को पेंशन योग्य सेवा के रूप में मान्यता देने की मांग को लेकर तहसीलदार शंकरगढ़ को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर के 23 जनवरी के फैसले के संदर्भ में दिया गया, जिसमें रमेश चंद्रवंशी, दिलीप साहू व अन्य और रामलाल डडसेना व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर निर्णय लिया गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पेंशन एक कल्याणकारी योजना है और इसे सेवाओं के बदले दिया जाने वाला स्थगित पारिश्रमिक माना जाना चाहिए। संविलियन से पूर्व दी गई दीर्घकालीन सेवाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि पुनर्विचार में सेवा की निरंतरता, कर्तव्यों की प्रकृति, वेतन का स्रोत, प्रशासनिक नियंत्रण और संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 के तहत समानता के सिद्धांत को ध्यान में रखा जाए। शंकरगढ़ में टीचर एसोसिएशन के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में शिक्षकों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए संविलियन पूर्व सेवा को पेंशन योग्य मानने की मांग की।


