अविभाजित सिंहभूम का जिला मुख्यालय रह चुका है चाईबासा। जबकि झारखंड बने करीब 25 वर्षों का समय बीत चुका है। समय के साथ शहर में काफी बदलाव आया। एक से एक रेस्टोरेंट, बैंक, अपार्टमेंट, प्राइवेट ऑफिस, शापिंग मॉल खुले। वहीं जनसंख्या व चार पहिए वाहन बढ़े। किंतु आज तक शहर में कहीं भी मुकम्मल पार्किंग की व्यवस्था नहीं हो पाई है। अधिकांश प्रतिष्ठानों के पास अपनी पार्किंग नहीं है। प्रशासन द्वारा शहर में पार्किंग की व्यवस्था के लिए जोर-शोर से बैठकों का दौर भी चला था। योजना बनी किंतु वे फाइलों में दब कर ही रह गई। ऐसे में बैंक के ग्राहक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में खरीदारी करने वाले लोगों को अपने वाहन सड़क किनारे खड़े करने पड़ते हैं। जब तक ये लोग अपने काम को निपटा नहीं लेते उनके वाहन सड़कों पर ही रहते हैं। इनमें बाइक से लेकर कार तक शामिल हैं। इसका परिणाम है कि सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है। शहर में जाम की समस्या का यह प्रमुख कारणों में से एक है। शहर के जैन मार्केट, कोर्ट रोड, काली मंदिर मार्ग, पिल्लई हॉल चौक, पोस्ट ऑफिस चौक, एसबीआई दुर्गा मंदिर, टेलीफोन एक्सचेंज के पास, मारवाड़ी मध्य विद्यालय से जैन आवास जाने वाला मार्ग, आमला टोला, नगर परिषद कार्यालय से आगे आदि कई स्थानों पर हर दिन जाम व वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।


