भास्कर न्यूज| चाईबासा जमशेदपुर गितिलिपी बाइपास रोड पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं के विरोध में गुरुवार को आदिवासी हो समाज यूथ कमेटी तथा अन्य सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में तांबो चौक को 4 घंटे तक जाम किया गया। जिस कारण तांबो चौक से होकर आने-जाने वाले वाहनों का आवागमन ठप रहा। सड़क जाम में शामिल आक्रोशित ग्रामीणों ने पूर्व की तरह ही सुबह 06 बजे से रात्रि 09 बजे तक शक्ति से नो एंट्री लागू करने की मांग कर रहे थे। सदर अनुमंडल पदाधिकारी संदीप अनुराग टोपनो, बीडीओ सदर अमिताभ, सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बहामन टूटी तथा सदर अंचल के सीओ उपेंद्र प्रसाद तथा जाम का नेतृत्व कर रहे सामाजिक नेताओं के बीच दो-तीन राउंड की वार्ता के बाद सहमति बनी और तांबो चौक को जाम मुक्त किया गया। जाम का नेतृत्व कर रहे सामाजिक नेताओं में गब्बर सिंह हेंब्रम, रियांश समद, बामिया बारी, तथा रमेश बलमुचू ने कहा कि नो एंट्री का पालन नहीं होने के कारण लोग सड़क दुर्घटनाओं में लगातार मर रहे हैं। साल भर में स्कूली बच्चों सहित नौ लोगों की सड़क हादसे में मौत हो चुकी है। इस संबंध में दो बार जिला प्रशासन तथा परिवहन मंत्री दीपक बिरूवा को मांग पत्र सौंपा जा चुका है। बावजूद इसके नो एंट्री का अनुपालन नहीं हो रहा है। जिस कारण बाध्य होकर हमें सड़क पर उतरना पड़ा। जाम का नेतृत्व कर रहे सामाजिक नेताओं ने एक स्वर में कहा कि पूर्व की तरह सुबह 06 से रात्रि 09 बजे तक नो एंट्री को शक्ति से लागू किया जाना चाहिए। यदि उनकी मांग को नजर अंदाज किया गया तो अनिश्चितकालीन जाम या आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। जाम समर्थकों में सामाजिक नेता रेयांश सामड ने जमकर परिवहन मंत्री दीपक बिरूवा होश में आओ, जिला प्रशासन होश में आओ, रूंगटा और टाटा स्टील की दलाली बंद करो आदि के नारे लगा रहे थे। ज्ञात हो कि एक जनवरी की सुबह 10 बजे बाइपास रोड स्थित वन विभाग कार्यालय के बगल की सड़क पर एक युवक की हुई दर्दनाक मौत व दो के घायल होने की घटना के विरोध में जाम किया गया था। सदर अनुमंडल पदाधिकारी ने कहा कि जमाकर्ताओं से वार्ता होने के बाद जमाकर्ताओं ने नो एंट्री को पूर्व की तरह सुबह 6 से रात्रि 09 बजे तक चालू रखने की मांग रखी। जिस पर हमने कहा कि इस पर हम निर्णय नहीं दे सकते। जिले के बड़े पदाधिकारी ही इस पर निर्णय दे सकते हैं। जिस पर जमाकर्ताओं ने वरीय पदाधिकारी से वार्ता कराने की बात कही। समाज के लोगों के पांच छह लोगों की सूची सौंपी गई है। इन लोगों के साथ जिला अधिकारियों की एक सप्ताह के भीतर कभी भी वार्ता हो सकती है। जिस पर सहमति होने के बाद समाज के नेताओं ने जाम को हटाया। सड़क सुरक्षा समिति में सिर्फ शहरी लोगों को रखा गया है। समिति में सामाजिक संगठन के लोगों को भी शामिल करने की मांग की गई। इन सारी बातों को जिला पदाधिकारी के समक्ष रखने की बात कही गई है।


