रांची | जिसने सत्य का आदि व अंत जान लिया, वही संत है। जो सदैव सत्य का आचरण करता है, आत्मज्ञानी होता है और जिनका जीवन पवित्र और धार्मिक होता है, वही संत है। संत का शाब्दिक अर्थ ‘सत्य’ है, जिसने संसारिक इच्छाओं और मोह-माया का त्याग कर दिया और ईश्वर भक्ति में लीन हो गया, वही सही मायने में संत है। संतों का हर वचन एक जीवन दर्शन होता है। उक्त बातें एचईसी आवासीय परिसर स्थित बी-277, सेक्टर तीन, धुर्वा निवासी धार्मिक-आध्यात्मिक विषयों के ज्ञाता रविन्द्र नाथ सिंह ने मंगलवार को अपने प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि संत हमें यह सिखलाते हैं कि जीवन सिर्फ भौतिकता तक ही सीमित नहीं है, वह कर्मों में विश्वास रखते हुए भक्ति को आवश्यक मानते हैं। उनके प्रवचन हमें संतुलित जीवन की प्रेरणा देते हैं।


