मशहूर स्टेज परफॉर्मर सपना चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने उनके पासपोर्ट नवीनीकरण से इनकार करने वाले आदेश को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने दस वर्ष की अवधि के लिए उनका पासपोर्ट नवीनीकृत करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब जमानत आदेश में विदेश यात्रा पर कोई रोक नहीं है, तब आपराधिक मामलों के लंबित होने के कारण पासपोर्ट नवीनीकरण से मना करना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और 19 (स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन है। विदेश यात्रा की अनुमति खारिज की यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने सपना चौधरी की याचिका पर पारित किया। याचिका में 30 जून 2025 के एक आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत पासपोर्ट नवीनीकरण और विदेश यात्रा की अनुमति इस आधार पर खारिज कर दी गई थी कि यात्रा की अवधि, देश और उद्देश्य से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे। जानी-मानी स्टेज परफॉर्मर सपना चौधरी की ओर से न्यायालय को बताया गया कि वह एक जानी-मानी स्टेज परफॉर्मर हैं और उन्हें देश-विदेश में कार्यक्रमों के लिए आमंत्रण मिलते रहते हैं। विदेशों में कार्यक्रमों के लिए वैध पासपोर्ट अनिवार्य होता है और पासपोर्ट न मिलने से उनके पेशेवर करियर तथा आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा था। विदेश जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया याचिका में यह भी कहा गया कि सपना चौधरी के खिलाफ वर्ष 2018 में लखनऊ के आशियाना थाने में दर्ज एफआईआर में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है। उस जमानत आदेश में विदेश जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया था। पासपोर्ट से वंचित रखना उचित नहीं न्यायालय ने टिप्पणी की कि किसी कलाकार या आम नागरिक को अनिश्चितकाल तक पासपोर्ट से वंचित रखना उचित नहीं है, खासकर तब जब उसके फरार होने की कोई आशंका न हो। कोर्ट ने यह भी माना कि सपना चौधरी की सामाजिक पहचान, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भारत में स्थायी निवास इस बात का संकेत हैं कि वह किसी भी तरह से फरार होने का जोखिम नहीं रखतीं।


