समय पर सुनवाई नहीं होने का मतलब न्याय से दूरी:हाईकोर्ट ने रेट चेयरमैन से कहा-फुल टाइम करो सुनवाई, तीन दिन में केस सुनवाई पर आना चाहिए

राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण (रेट) में लंबित अपीलों के मामले मे आज रेट चेयरमैन विकास सीतारामजी भाले और रेट रजिस्ट्रार हाईकोर्ट में पेश हुए। हाईकोर्ट ने चेयरमैन से अधिकरण में सुनवाई का मैकेनिज्म पूछा। चेयरमैन ने कहा कि हम सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक मामलों की सुनवाई करते हैं। इस पर जस्टिस समीर जैन की अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि समय पर सुनवाई नहीं होने का मतलब है व्यक्ति को न्याय से दूर रखना। कोर्ट ने रेट चेयरमैन को निर्देश दिया कि रेट में सभी बैंच फुल टाइम सुनवाई करें। वहीं, रेट में पेश होने वाली नई अपील तीन दिन में सुनवाई के लिए लिस्ट होनी चाहिए। अदालत ने यह निर्देश मोहम्मद काशिफ की ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिकाकर्ता की अपील पर 15 दिन सुनवाई नहीं हुई दरअसल, याचिकाकर्ता ने रेट में ट्रांसफर अपील दायर की थी। इसकी सुनवाई 15 दिन तक नहीं हुई। उसके बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। इस पर हाईकोर्ट ने रेट चेयरमैन और रजिस्ट्रार को तलब किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने आया कि रेट में अपील दायर होने के बाद उसका 20 से 25 दिन तक नम्बर नहीं आ रहा हैं। वर्तमान में रेट में करीब 2 हजार अपील दायर हो चुकी है। वहीं अभी 1 हजार से ज्यादा अपीलें ही सुनवाई के लिए लिस्ट हुई हैं। इस पर कोर्ट ने रेट चेयरमैन को निर्देश दिया कि रेट में अपील दायर होने के तीन दिन बाद मामला सुनवाई के लिए लिस्ट होना चाहिए। राज्य कार्मिकों की सेवा संबंधी मामलों की सुनवाई राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण (रेट) प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर आरएएस अधिकारियों के सेवा संबंधी मामलों की सुनवाई करता है। रेट में एक चेयरमैन, एक न्यायिक सदस्य और दो गैर न्यायिक सदस्य (आरएएस, रिटायर आरएएस) होते हैं। इनकी डीबी कार्मिकों के ट्रांसफर, प्रमोशन, वरिष्ठता, सलेक्शन स्केल सहित तमाम तरह के सेवा संबंधी मामलों की सुनवाई करती है। अब हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए है कि 30 दिन में निगम, कॉरपोरेशन और बोर्ड में कार्यरत कार्मिकों के सेवा संबंधी मामलें भी सुनवाई के लिए रेट को दें। अभी तक इनके मामले हाई कोर्ट सुनती है। रेट के वकील संदीप कलवानियां ने बताया कि कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान यह भी मंशा जाहिर की थी कि जो दो गैर न्यायिक सदस्य रेट में लगाए जाते है। वह विषय विशेषज्ञ हो तो बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अधिवक्ता समुदाय भी मांग कर रहा है कि रेट में विषय विशेषज्ञ अधिवक्ता को सदस्य के तौर पर लगाया जाए। जिससे मामलों का जल्द निस्तारण हो सके।

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