सिटी एंकर जलवायु परिवर्तन का असर इस बार आम की पैदावार पर दिख रहा है। समय से पहले न्यूनतम और अधिकतम तापमान में हुई बढ़ोतरी की वजह से इस बार गर्मी का अहसास फरवरी की शुरुआत से ही होने लगा था। गर्मी की वजह से ही आम के पेड़ मंजर से भर गए हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार आम के पेड़ों पर आए मंजर को देखकर किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। ओरमांझी के प्रगतिशील किसान घंसू महतो ने बताया कि इस बार रांची जिले में मनरेगा, जेएसएपीएल सहित विभिन्न योजनाओं और निजी तौर पर करीब 10 हजार हेक्टेयर में आम के पेड़ों से उत्पादन हो रहा है। इससे दो हजार टन से अधिक आम की पैदावार होने की उम्मीद है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार 19 फरवरी से मौसम में बदलाव होगा। दो से तीन दिन बारिश की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ की वजह से इस माह के अंत तक एक-दो सिस्टम बनने की संभावना है। अच्छी बारिश हुई तो आम का काफी बढ़िया उत्पादन हो सकता है। दरअसल, इस बार एक फरवरी को ही रांची का अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया था। पिछले 16 दिनों में छह दिन अधिकतम तापमान 30 डिग्री या उससे अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान भी 15 से 16 डिग्री तक पहुंच गया। इस वजह से गर्मी बढ़ गई है। मौसम वैज्ञान केन्द्र के आंकड़े की मानें तो इस बार मार्च की शुरुआत से ही तेज गर्मी पड़ने के आसार हैं। मार्च के मध्य से लू चलने की संभावना है। क्योंकि, अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस को पार कर सकता है। पिछले 10 साल के रिकॉर्ड को देखे तो मार्च में अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री के बीच रहा है। झारखंड में एक साल के अंतराल का ट्रेंड गर्मी बढ़ने से पेड़ पर मंजर अधिक आते हैं


