समाप्त कानून में 15 साल चला केस:खाद्य पदार्थ बेचने का लाइसेंस नहीं होने पर 2010 में दर्ज किया था मामला, कोर्ट ने दुकानदार को किया बरी

झालावाड़ में एक दुकानदार को लगभग 15 साल तक अदालत में पेशी पर हाजिर होने के बाद बरी कर दिया गया है। यह मामला एक ऐसे कानून के तहत दर्ज किया गया था जिसे भारत सरकार ने पहले ही समाप्त कर दिया था। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के खाद्य निरीक्षक ने 8 फरवरी 2011 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट झालावाड़ के कोर्ट में यह इस्तगासा पेश किया था। अभियुक्त के अधिवक्ता ओंकारेश्वरम शर्मा ने बताया कि खाद्य निरीक्षक ने 30 अक्टूबर 2010 को खानपुर निवासी शैतान सिंह की मिष्ठान की दुकान का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान 22 लीटर दूध मिलावटी होने का संदेह जताया गया था। साथ ही, दुकानदार के पास खाद्य पदार्थ बेचने का लाइसेंस भी नहीं मिला था। विचारण के दौरान कोर्ट ने दूध में मिलावट साबित नहीं माना, लेकिन लाइसेंस न होने के आधार पर शैतान सिंह को दोषी ठहराया। कोर्ट ने शैतान सिंह को 6 माह के साधारण कारावास और 1000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायाधीश झालावाड़ के समक्ष अपील दायर की गई। अपीलीय न्यायालय ने इस विधिक बिंदु पर निर्णय दिया कि निरीक्षण की तारीख को ‘फूड एडल्टरेशन एक्ट 1954’ भारत सरकार द्वारा समाप्त कर दिया गया था। ऐसे में समाप्त हो चुके कानून के तहत अभियुक्त को दोषी मानना एक कानूनी त्रुटि थी। इसके बाद अपीलीय न्यायालय ने अभियुक्त को दोषमुक्त कर बरी करने का आदेश सुनाया।

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