सरकार बोली- AQI–फेफड़े की बीमारी में कनेक्शन नहीं:रिसर्च में दावा- खराब हवा से फेफड़ों की क्षमता घट रही

केंद्र सरकार ने कहा है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के ऊंचे स्तर और फेफड़ों की बीमारियों के बीच सीधा संबंध साबित करने वाले ठोस वैज्ञानिक आंकड़े नहीं हैं। हालांकि, वायु प्रदूषण को श्वसन रोगों के बढ़ने का एक कारण माना गया है। यह जानकारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में लिखित जवाब में दी। भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने सवाल किया था कि क्या दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय तक खतरनाक AQI रहने से फेफड़ों की क्षमता कम हो रही है।। वहीं, मेडिकल जर्नल ऑफ एडवांस्ड रिसर्च इंडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया कि खराब हवा के कारण फेफड़ों के काम करने की क्षमता घट रही है। दिल्ली में तीन साल में सांस की दिक्कत के 2 लाख से ज्यादा मरीज दिल्ली में 24 घंटे में 11700 चालान कटे, 12164 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया शहर में आने से 542 ट्रकों को डायवर्ट किया पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह के मुताबिक शहर में एंट्री करने से 542 ट्रकों को रोका और डायवर्ट किया गया। साथ ही, शहर में 34 ट्रैफिक जाम वाले बिंदुओं को खाली कराया गया। सिरसा ने नागरिकों और संस्थानों से प्रदूषण नियंत्रण उपायों में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने और हवा की गुणवत्ता में सुधार बनाए रखने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी है। 3 तस्वीरों में देखिए दिल्ली में प्रदूषण का हाल
———————————– दिल्ली प्रदूषण से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- प्रदूषण के लिए सिर्फ किसान जिम्मेदार नहीं, कोविड में भी पराली जलाई फिर भी आसमान साफ था सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में बढ़ रहे प्रदूषण पर केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों को फटकार लगाई। अदालत ने वायु प्रदूषण के लिए सिर्फ किसानों को जिम्मेदार ठहराने पर आपत्ति जताई। सुप्रीम कोर्ट ने एमसी मेहता की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पराली जलाना नया नहीं है। 4-5 साल पहले कोविड और लॉकडाउन के दौरान भी पराली जलाई जा रही थी फिर भी आसमान साफ और नीला दिखाई देता था, अब क्यों नहीं? पूरी खबर पढ़ें…

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