लुधियाना| सर्दियों के मौसम में पशुओं की उचित देखभाल बेहद जरूरी है, ताकि उन्हें ठंड से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सके और दुग्ध उत्पादन भी प्रभावित न हो। ये विचार गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज़ यूनिवर्सिटी के पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. यशपाल सिंह ने व्यक्त किए। डॉ. यशपाल सिंह ने बताया कि ठंडी हवाओं से बचाव के लिए पशु शेडों को पर्दे लगाकर बंद करना चाहिए। इसके लिए तिरपाल, सूखी घास, पराली या बांस का इस्तेमाल किया जा सकता है। शेडों के आसपास लगे पेड़ों की छंटाई जरूरी है, ताकि धूप अंदर तक पहुंच सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि शेड के अंदर आग नहीं जलानी चाहिए, बल्कि धूप निकलने पर पशुओं को बाहर निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि ठंड के कारण पशुओं में बुखार, निमोनिया और मोक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए फर्श को सूखा रखना जरूरी है और उस पर सूखी घास, पराली, तूड़ी या चावल की भूसी बिछानी चाहिए। पशुओं के शरीर पर ओढ़ाने से भी उनकी गर्मी बनी रहती है। शेडों की दिन में दो बार सफाई और पानी-गोबर की निकासी की उचित व्यवस्था जरूरी है। पशुओं को नहलाने से बचते हुए सूखे कपड़े या पराली से सफाई करनी चाहिए, जरूरत पड़ने पर गुनगुने पानी का ही प्रयोग करें। पोषण पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि सर्दियों में बरसीम का चारा दुधारू पशुओं के लिए लाभकारी होता है। हरे चारे की कमी होने पर दलहनी चारे में तूड़ी मिलाकर देना चाहिए। साथ ही खनिज मिश्रण, नमक और स्वच्छ गुनगुना पानी देना आवश्यक है। कृमिनाशक और किलनी-नाशक दवाओं का समय पर प्रयोग भी जरूरी बताया गया।


