राजस्थान फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ एकीकृत जिला शाखा सलूंबर ने बुधवार को फार्मासिस्टों की गंभीर कमी को लेकर जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। संघ ने मुख्यमंत्री, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, प्रमुख शासन सचिव तथा वित्त मंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन जिला कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में बड़ी संख्या में दवा वितरण केंद्र फार्मासिस्टों के बिना संचालित हो रहे हैं। इससे मरीजों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है और राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) का पालन भी संभव नहीं हो पा रहा है। कुल 10,032 नए फार्मासिस्ट पद सृजित करने की मांग संघ ने मांग की है कि न्यूनतम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और उससे ऊपर के सभी चिकित्सा संस्थानों में सब-स्टोर तथा दवा वितरण केंद्रों के लिए कुल 10,032 नए फार्मासिस्ट पद सृजित किए जाएं। इनमें 391 अधीक्षक फार्मासिस्ट, 1435 फार्मासिस्ट ग्रेड प्रथम और 8206 फार्मासिस्ट के पद शामिल हैं। फार्मासिस्ट ग्रेड प्रथम में पदोन्नति के बाद विलोपित किए गए 999 फार्मासिस्ट पदों को पुनः स्वीकृत करने की भी मांग की गई है। ज्ञापन में यह भी बताया है कि चिकित्सा संस्थानों में रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि फार्मासिस्टों के स्वीकृत पद अपर्याप्त हैं। इसका सीधा असर पेशेंट काउंसलिंग, दवा वितरण, दवा भंडारण और उपचार की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। फार्मासिस्टों की कमी के कारण मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना, मा योजना, आरजीएचएस, जननी-शिशु सुरक्षा योजना, सेंट्रल स्टोर, एमएनडीवाई ड्रग वेयरहाउस और भर्ती मरीजों को बेड पर दवा उपलब्ध कराने जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन बाधित हो रहा है। संघ ने बताया कि दवाओं के टेंडर, परचेसिंग, बफर स्टॉक मैनेजमेंट, दवा परामर्श एवं वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य केवल प्रशिक्षित फार्मासिस्टों द्वारा ही प्रभावी ढंग से संपादित किए जा सकते हैं। जिला कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने ज्ञापन पर सकारात्मक टिप्पणी करते हुए इसे मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधि मंडल रहा उपस्थित इस अवसर पर जिला अध्यक्ष भरत मेहता, सचिव अर्जुनलाल मीणा, नारायण मेघवाल, शुभम शर्मा, आशा जोशी, नीलम मेहता सहित अनेक फार्मासिस्ट उपस्थित रहे।संघ ने उम्मीद जताई कि पद सृजन से स्वास्थ्य व्यवस्था सुदृढ़ होगी और योजनाओं का फायदा आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंचेगा।


