सवालों के घेरे में एसआईआर:फॉर्म-7 के जरिये नाम काटने के आवेदन, लेकिन यह फॉर्म जिन्होंने भरे, उन्हें ही जानकारी नहीं

एसआईआर के तहत मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। नियमों के अनुसार एक दिन में किसी राजनीतिक दल का बीएलए अधिकतम 10 मतदाताओं के नाम काटने की आपत्ति दर्ज करा सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। दस्तावेजों के मुताबिक एक ही दिन में एक-एक व्यक्ति ने 100 से 300 तक आपत्तियां दर्ज कराईं हैं। अब तक कुल 12 हजार 746 आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं। सबसे ज्यादा आपत्तियां नरेला विधानसभा से आई हैं, जहां अकेले 5 हजार 110 आपत्तियां दर्ज हुईं। इस स्थिति ने एसआईआर की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में पता चला है कि जिन नामों से आपत्तियां दर्ज हुई हैं, उनमें से ज्यादातर को इसकी जानकारी ही नहीं है। अधिकांश मामलों में कहा गया कि वोटर दिए गए पते पर नहीं रहते, जबकि जांच में वे वहीं रह रहे हैं। आवेदनों में बड़ी गड़बड़ी… कांग्रेस ने कहा- फर्जी आपत्ति कराने वालों को चिह्नित कर रहे, दर्ज कराएंगे एफआईआर भाजपा टारगेट कर नाम कटवा रही है
भाजपा कार्यकर्ता टारगेट कर फॉर्म-7 भरकर वोटर्स के नाम पर आपत्ति पेश कर रहे हैं। ऐसे लोगों की शिकायत थाने और आयोग दोनों जगह पर की जा रही है। ज्यादातर आपत्ति ऑनलाइन दर्ज करा दी गई हैं। इन्हें चिह्नित कर एफआईआर कराएंगे। -प्रवीण सक्सेना, जिलाध्यक्ष कांग्रेस बिना सबूतों के बातें करती है कांग्रेस
कांग्रेस बिना सबूत के निराधार बातें करती है। यदि कोई सबूत हैं तो निर्वाचन आयोग को दें। आयोग फैसला करेगा कि क्या सही है और क्या गलत। कोई दल ये तय नहीं कर सकता है कि किसका नाम कटना है और किसका नहीं। -रविंद्र यती, जिलाध्यक्ष भाजपा बीएलओ नहीं, ऑनलाइन आपत्ति लगीं
ज्यादातर आपत्ति ऑनलाइन लगाई गई हैं। यानी बीएलओ को ये आपत्ति सीधे नहीं दी गई। इसका मतलब साफ है कि कोई ये चाहता ही नहीं था कि ये पता चल सके कि ये आपत्ति किसके द्वारा लगाई जा रही हैं। बीएलओ के पास यदि ये आपत्ति दी जाती तो बीएलओ को इसकी जानकारी होती। पक्ष सुने बिना नहीं हटाएंगे नाम
आपत्तियों की जांच का जिम्मा बीएलओ को सौंपा है। संबंधित वोटर को नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। पक्ष सुनने व जांच के बाद ही नाम हटाने या नहीं हटाने का फैसला लिया जाएगा।
-भुवन गुप्ता, उप जिला निर्वाचन अधिकारी

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