भास्कर न्यूज | बीजापुर जिला मुख्यालय में वन विभाग की कार्रवाई से एक बार फिर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। बताया जाता है कि रविवार की देर रात अवैध लकड़ी तस्करी की सूचना पर वन विभाग की टीम ने पिकअप को पकड़ा। वाहन में सागौन लकड़ी से तैयार दरवाजे और खिड़की लोड थे। जब चालान और दस्तावेज मांगे गए तो वाहन चालक ने कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किया, जिसके बाद वन विभाग के अमले ने गाड़ी व दरवाजे-खिड़कियों को बीजापुर डीपो में खड़ा कर दिया। इस कार्रवाई के आधे घंटे बाद डारापारा के नरेश फर्नीचर मार्ट के नाम पर बैक डेट का बिल प्रस्तुत करने के बाद दोपहर को पिकअप व लकड़ी के दरवाजे-खिड़की वन विभाग ने छोड़ दी। फर्नीचर मार्ट के संचालक नरेश ने बताया कि लकड़ी डिकेश चिलमुल नाम के व्यक्ति को बेची गई थी, लेकिन हड़बड़ी में ड्राइवर को वह बिल नहीं दे पाया था। इसके बाद केवल बिल देखकर वन विभाग के अफसरों ने बिना भौतिक सत्यापन व स्टॉक मिलान किए बिना ही जब्त लकड़ियों को छोड़ दिया। उपवनमंडलाधिकारी देवेंद्र गौड़ ने बताया कि फर्नीचर मार्ट संचालक को नोटिस जारी किया गया है। कुछ दिनों पहले जिले की फर्नीचर दुकानों पर छापामार कार्रवाई की थी, जिसमें लाखों की अवैध सागौन सहित अन्य लकड़ियों को बरामद किया गया था। इधर जिले में अधिकांश फर्नीचर मार्ट बिना पंजीयन के चल रहे हैं। ऐसे में अंदेशा जताया जा रहा है कि जंगलों से अवैध कटाई के बाद बेशकीमती सागौन की लकड़ी की तस्करी में ये मार्ट ही संलिप्त हैं।


