सिंगरौली जिले में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए कोयला खदानों और पावर प्लांट के लिए बुधवार को दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत सभी कोयला खदानों में सेमी ऑटोमैटिक तारपोलिन स्टैंड की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा जिले में संचालित एनटीपीसी पावर प्लांट और हिंडालको महान अल्युमिनियम प्लांट के ताप बिजली घरों की इकाइयों में सल्फर डाई ऑक्साइड के नियंत्रण के लिए FGT प्लांट की स्थापना के निर्देश दिए गए। कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला के मुताबिक, एनजीटी के निर्देश पर सचिव स्तर की बैठक हुई थी, जिसमें फ्लाई एश यूटिलाइजेशन और मैनेजमेंट और प्रदूषण के संबंध में चर्चा हुई। सिंगरौली जिले की हवा में सुधार लाने के लिए इस बात का निर्णय हुआ कि जिले में संचालित जो स्टोन क्रशर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइड लाइन का पालन नहीं करते, उनमें कड़ी कार्रवाई होगी। इसके अलावा कोयला का खनन करने के लिए जो भी कंपनियां काम कर रही हैं और कोयले का परिवहन करती हैं, वहां पर सेमी ऑटोमैटिक तारपोलिन स्टैंड की व्यवस्था करना होगा, ताकि कोल परिवहन में लगे ट्रकों के चारों तरफ तारपोलिन की कवरिंग की जा सके। कलेक्टर ने बताया कि 23 दिसंबर को दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्तर की बैठक होगी, जिसमें सिंगरौली के प्रमुख उद्योगों के प्रतिनिधि, कलेक्टर और खनिज अधिकारी रहेंगे।


