क्रांतिवीर तात्याटोपे विश्वविद्यालय की बिल्डिंग सिंगवासा में ही बनेगी। बुधवार को कलेक्टर ने यूनिवर्सिटी के लिए सिंगवासा में जमीन आवंटित कर दी। यूनिवर्सिटी के लिए 25 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई है। इसकी सूचना उच्च शिक्षा विभाग को भी दी गई है। इसको विभाग के नाम ट्रांसफर कर दिया गया है। बता दें कि जिले में लंबे समय से यूनिवर्सिटी की मांग की जा रही थी। 9 फरवरी 2024 को उच्च शिक्षा विभाग ने गुना में यूनिवर्सिटी स्वीकृत की थी। पहले यह जानकारी थी कि गुना के पीजी कॉलेज को ही यूनिवर्सिटी बनाया जाएगा। हालांकि, बाद में विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी अलग से बनेगी। घोषणा के बाद यूनिवर्सिटी का 2024-25 सत्र शुरू भी कर दिया गया है। वर्तमान में यूनिवर्सिटी मॉडल कॉलेज जगनपुर की बिल्डिंग में संचालित हो रही थी। यूनिवर्सिटी की घोषणा के बाद से ही कैंपस के लिए जमीन तलाशी जानी लगी थी। उच्च शिक्षा विभाग ने आयुक्त उच्च शिक्षा भोपाल द्वारा आवेदन ऑनलाइन प्रस्तुत कर ग्राम सिंगवासा में क्रांतिवीर तात्योटोपे विश्वविद्यालय के निर्माण के लिये भूमि आवंटित करने का अनुरोध किया गया। प्रस्तुत आवेदन के क्रम में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गुना से प्रारूप प्रतिवेदन मांगा गया। क्रांतिवीर तात्याटोपे विश्वविद्यालय के लिए भूमि हस्तांतरण की अनुशंसा सहित प्रकरण प्रस्तुत किया गया। भूमि आवंटन के संबंध में जिला नजूल निर्वतन समिति की बैठक आयोजित की गयी, जिसमें क्रांतिवीर तात्याटोपे विश्वविद्यालय निर्माण के लिए भूमि उच्च शिक्षा विभाग को आवंटित करने पर विचार किया गया। इसी क्रम में कलेक्टर डॉ सतेन्द्र सिंह ने ग्राम सिंगवासा तहसील गुना (नगर) स्थित भूमि सर्वे नंबर 229 रकबा 0.961 एवं सर्वे नंबर 230 रकबा 5.017 व सर्वे नंबर 406/1/1 रकबा 19.022 कुल रकबा 25 हेक्टेयर भूमि को भूमि आयुक्त उच्च शिक्षा को जमीन हस्तांतरित किये जाने का निर्णय लेकर आवेदक विभाग को सूचित कराया गया। जनप्रतिनिधि दूसरी जगह के लिए बना रहे थे दबाव सूत्रों की मानें तो जैसे ही यूनिवर्सिटी के लिए जमीन खोजने की बात आई, जिले के एक जनप्रतिनिधि यूनिवर्सिटी के लिए सौंजना गांव में जमीन देने के लिए प्रयास कर रहे थे। इस जमीन के पास ही उनके एक समर्थक की जमीन लगी हुई है। इस कारण उन्होंने अधिकारियों पर भी वही जमीन चयनित करने के लिए दबाव भी बनाया। हालांकि, यह जमीन गड्ढों से भरी हुई थी। इस जमीन पर पहले क्रशर संचालित होती थी। इस कारण यहां बड़े-बड़े गड्ढे थे। अगर इस जमीन का चयन किया जाता, तो करोड़ों रुपए केवल गड्ढे भरने में ही खर्च हो जाते, इसीलिए सिंगवासा की जमीन को ही प्राथमिकता दी जा रही थी। अंत में जनप्रतिनिधि के प्रयास सफल नहीं हुए और सिंगवासा में ही यूनिवर्सिटी के लिए जमीन आवंटित कर दी गई।


