सिरप से मासूमों की मौत रगों में घोला ‘जहर’:10 जानें जा चुकी थी, डाक से भेजे सैंपल, ये 3 दिन बाद पहुंचे, दशहरे के बाद जांच

मप्र सरकार का तर्क- मौतों की खबर के बाद तुरंत कार्रवाई की, जांचें की जहरीले कफ सिरप से मंगलवार को दो और बच्चों की मौत हो गई। परासिया (छिंदवाड़ा) के रिधौरा में रहने वाले कपिल पवार के इकलौते बेटे वेदांश (2) ने नागपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ा। वहीं, जुन्नारदेव के बुधवारा की रहने वाली राजेश यदुवंशी की बेटी जायुशा (2) की भी मौत हो गई। उसे 20 सितंबर को परासिया के डॉ. प्रवीण सोनी को दिखाया गया था। बाद में नागपुर में इलाज चल रहा था। अब बच्चों की मौतों का कुल आंकड़ा 19 हो गया है। इधर, पूरे देश में हड़कंप मचने पर राज्य सरकार का दावा है कि उसने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी थी। विशेषज्ञों को लगाया, दवाओं की जांच करवाई गई, दोषियों पर कार्रवाई की गई और बच्चों के इलाज की पूरी व्यवस्था की गई। लेकिन सच यह है कि ज्यादातर बच्चों की जान सिस्टम की देरी के कारण गई। छिंदवाड़ा से 300 किमी दूर सैंपल भिजवाने में ही 3 दिन लग गए। दरअसल, 27 सितंबर को नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल व सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन की टीम परासिया पहुंची। यहां मप्र के ड्रग इंस्पेक्टर्स ने मिलकर 27, 28 और 29 सितंबर तक कोल्ड्रिफ सिरप और अन्य सैंपल जुटाए। बच्चों की किडनी बायोप्सी में पता चला कि 80% मामलों में एक ही सिरप कॉमन था- कोल्ड्रिफ। जब तक सैंपल भेजे गए, 10 बच्चों की मौतें हो चुकी थी। छिंदवाड़ा में सिरप 29 को ही बैन… प्रदेश में 4 अक्टूबर को
29 सितंबर शाम को छिंदवाड़ा कलेक्टर ने इस सिरप पर जिले में बैन लगा दिया। लेकिन प्रदेश में इसकी बिक्री जारी रही। अंतत: जांच रिपोर्ट आने के बाद इसे 4 अक्टूबर को प्रदेशभर में बैन लगा। मप्र में 29 सितंबर को सैंपल लिए, रिपोर्ट 4 अक्टूबर को आई, तमिलनाडु को 1 अक्टूबर को पत्र लिखा, 3 को रिपोर्ट जारी नागपुर में बीमार बच्चों का इलाज करवा रही सरकार, टीम तैनात की इधर, सुप्रीम कोर्ट में याचिका, कफ सिरप से बच्चों की मौत की सीबीआई जांच हो मध्य प्रदेश और राजस्थान में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता विशाल तिवारी ने सीबीआई जांच और देशभर की दवा सुरक्षा प्रणाली की समीक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों की जांचों से जवाबदेही बिखर गई है, जिससे बार-बार जहरीली दवाएं बाजार में आती हैं। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में राष्ट्रीय समिति गठित करने का भी अनुरोध। सभी संदिग्ध दवाओं की टॉक्सिकोलॉजिकल जांच केवल एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब में कराए जाने के बाद ही बिक्री या निर्यात की अनुमति देने की मांग।

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