सिर्फ ऋतु परिवर्तन का नहीं, ज्ञान, विवेक और आत्मिक जागरण का भी प्रतीक है बसंत का पर्व

मिथिला पूजा सेवा समिति स्मृति की ओर से कमल विहार में बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में भव्य भजन संध्या करवाई गई। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान से गुरुदेव आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मेधावी भारती ने कहा कि बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक और आत्मिक जागरण का भी प्रतीक है। जिस प्रकार बसंत ऋतु प्रकृति में नई ऊर्जा और उल्लास भर देती है, उसी प्रकार सद्गुरु का ज्ञान मानव जीवन को अज्ञानता से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाता है। उन्होंने माता सरस्वती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्ची विद्या वही है जो हमें आत्म-ज्ञान की ओर अग्रसर करे और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए। कार्यक्रम के अंत में समिति के सदस्यों ने साध्वी का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं। इस अवसर पर साध्वी पल्लवी भारती, साध्वी रीता भारती, साध्वी वसुधा भारती, दुखमोचन मिश्रा, चंद्र मोहन झा, एसके झा, चंदन मिश्रा, राजेश पाठक, प्रभास झा व अन्य मौजूद रहे।

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