भास्कर न्यूज | जालंधर अर्बन अस्टेट फेस-1 स्थित श्री गीता मंदिर में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान एवं श्री गीता मंदिर के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को पांच दिवसीय श्री शिव कथा का भव्य शुभारंभ किया गया। भक्तिमय वातावरण और श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के बीच कथा के पहले दिन आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मेधावी भारती ने शिव तत्व की महत्ता पर प्रकाश डाला और मानव जीवन को नई दिशा देने का आह्वान किया। साध्वी मेधावी भारती ने कथा के माध्यम से भक्तों को कहा कि भगवान शिव की कथा मात्र सुनने से ही जीवन में परिवर्तन नहीं आता। आनंद प्राप्ति के लिए एक अनिवार्य शर्त है कि केवल श्रवण काफी नहीं है। श्रवण के पश्चात मनन आवश्यक है। जब मनुष्य सुनी हुई बातों पर चिंतन करता है, तभी वह जीवन के वास्तविक सार को खोज पाता है और उसके लिए मोक्ष के द्वार खुलते हैं। भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और नामों की व्याख्या करते हुए साध्वी ने बताया कि ‘शिव’ शब्द स्वयं में कल्याण और त्याग की भावना समेटे हुए है। विश्व इतिहास में जितनी भी सफल क्रांतियां हुई हैं, वे त्याग के विचार पर ही टिकी थीं। भगवान श्रीराम ने चौदह वर्ष का वनवास और उनका बलिदान ही ‘राम-राज्य’ की स्थापना का आधार बना। भगवान शिव की हर लीला हमें समाज के कल्याण के लिए अपना सर्वस्व त्यागने की प्रेरणा देती है। गुरु ही परमात्मा से मिलन करवाने वाले हैं जीवन के अंतिम लक्ष्य की चर्चा करते हुए कथाव्यास ने बताया कि आत्मा का परमात्मा से मिलन एक पूर्ण सद्गुरु के बिना संभव नहीं है। आंतरिक उत्थान के लिए ब्रह्म ज्ञान को ही वास्तविक तत्व बताया गया। उन्होंने कहा कि एक सच्चा गुरु ही हमारी दिव्य दृष्टि (तीसरा नेत्र) खोलकर हमें उस ब्रह्मधाम तक ले जा सकता है, जहां शाश्वत मुक्ति और आनंद का साम्राज्य है। गुरु ही परमात्मा से मिलन करवाने वाले हैं। कथा के दौरान संगीत की मधुर लहरियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। साध्वी मीनाक्षी भारती, साध्वी पुष्पभद्रा भारती, साध्वी संदीप, साध्वी भार्गवी भारती और सतिंदर भारती द्वारा प्रस्तुत किए गए शिवमय भजनों पर भक्त झूमने को मजबूर हो गए। इस मौके स्वामी सज्जनानंद, मंदिर के प्रधान राजेश अग्रवाल, हरि राम सिंगला, महेंद्र प्रताप, अनुराग अग्रवाल, नरगिस बत्रा, अंशुमन पुरी, विजय गुप्ता, योगेश सूरी, सतीश रहेजा, एएल धवन, विनय सलूजा, संजीव शर्मा, कमल कुमार, वरिंदर भगत व अन्य श्रद्धालु उप स्थित थे।


