पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने जीवन के सबसे कठिन समय से गुजर रहे हैं। पिता के जाने की शोक, पीड़ा और आंसुओं के बीच वे रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित पैतृक आवास से शासन-प्रशासन का संचालन कर रहे हैं। एक ओर परंपरागत विधि-विधान से अंतिम संस्कार से जुड़े रस्म निभा रहे हैं, तो दूसरी ओर राज्य के विकास की गति को बनाए रखने के लिए जरूरी फाइलों का निपटारा भी कर रहे हैं। राज्यहित में लगातार सक्रिय, कर रहे कार्यों की समीक्षा गहरे शोक के बावजूद सीएम राज्यहित से जुड़े मामलों पर पूरी तरह सजग हैं। वे नियमित रूप से वरीय अधिकारियों से संवाद कर सरकारी कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि आम जनता की समस्याओं का तत्काल समाधान हो और किसी भी कार्य में कोताही न बरती जाए। अपर प्रधान मुख्य सचिव अविनाश कुमार जरूरी फाइलों के साथ नेमरा पहुंचे, जिनका मुख्यमंत्री ने त्वरित निष्पादन किया। जनता से मिली कर्तव्यों के निर्वहन की ताकत मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कठिन समय में राज्य की जनता ने जिस तरह उनके परिवार का साथ दिया, उससे उन्हें अपने कर्तव्यों के निर्वहन की ताकत मिली। उन्होंने याद किया कि बाबा हमेशा कहते थे कि सार्वजनिक जीवन में जनता के लिए खड़ा रहना चाहिए। दिशोम गुरु ने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर झारखंड की पहचान और हक के लिए संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष किया। वादों को निभाने का संकल्प सीएम ने दोहराया कि बाबा ने राज्य के भविष्य को लेकर उनसे कई वचन लिए थे और वे इन्हें हर हाल में पूरा करेंगे। इधर, शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो भी नेमरा पहुंचे और शिबू सोरेन को नमन किया। उन्होंने कहा कि बाबा की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन उनके मार्ग पर चलना ही अब सबका कर्तव्य है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सीएम ने बाबा को भोजन परोसने की रस्म भी निभाई। किसानों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने नेमरा में धनरोपनी कर रहे किसानों और महिलाओं से मुलाकात की। उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और कहा कि उनका कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने लोगों को सरकारी योजनाओं से जुड़ने और खुद को सशक्त बनाने का आग्रह किया। सीएम ने भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से होगा और वे हमेशा किसानों के साथ खड़े रहेंगे।


