तिलक राज वालिया के सान्निध्य में श्री राम मंदिर में चल रहे श्री रामायण महायज्ञ में रविवार को सुंदरकांड का पाठ हुआ। जिसमें सैकडों राम भक्तों ने आकर कथा का आनंद उठाया। कथा में वालिया जी ने कहा कि अशोक वाटिका में रावण ने माता सीता को बंदी बनाकर कैद कर रखा था। हनुमान जी समुंदर पार करके माता जी के पास पहुंचे। हनुमान जी ने देखा कि असुरियां माता पर बहुत अत्याचार कर रही थीं। जब श्री हनुमान जी माता से मिले तो उन्होंने कहा कि ‘हे माता यदि आप मेरी पीठ के ऊपर सवार हो जाए तो मैं आपको अभी राघव जी के पास ले जाऊंगा। परंतु माता सीता जी ने मना कर दिया। उन्होंने इसके तीन कारण बताएं। पहला हे हनुमान हम दोनों समुंदर में गिर जाएं और मगरमच्छ हमें खा जाएं तो राघव जी को इसकी सूचना देने वाला कौन होगा और वह इंतजार ही करते रहेंगे। इसलिए मैं आपके साथ नहीं जाऊंगी। वालिया जी ने कहा कि पहले कारण से माता का राघव जी के प्रति असीम प्यार का पता चलता है। दूसरी बात माता ने धर्म की कह दी, हे हनुमान आपके साथ में नहीं जा सकती माता धर्म की पक्की थी। तीसरी बात माता ने आन की कर दी कि मैं राघव जी की पत्नी हूं राघव स्वयं आकर मुझे जीत कर ले जाएं। क्योंकि मुझे मरने का कोई डर नहीं है। इस यज्ञ में विशेष रूप से पधारे विधायक डॉ. कुंवर विजय प्रताप सिंह, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन अशोक तालवाड ने रामपाल चतरथ, अशोक शर्मा, विजय रौली, अश्विनी बाली, अश्विनी शर्मा, विपन हांडा, पन्नालाल आहूजा और कुलदीप गंडोत्रा के साथ मिलकर प्रज्ज्वलित जलाई।


