सुदामा चरित्र ने छुआ श्रद्धालुओं का हृदय भक्ति और सच्ची मित्रता का मिला संदेश

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव ग्राम सांकरा में साहू परिवार के तत्वावधान में संगीतमय श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। ईरा के प्रधान पाठक और शिक्षा के क्षेत्र में 40 साल तक सेवा देने के बाद सेवा निवृत हुए लाल कुमार साहू ने गांव में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया है, जहां रोज सैकड़ों भक्त आप पास के गांव से पहुंचे रहे हैं। व्यासपीठ पर बैठे भगवताचार्य पं. कृष्णधर दीवान राजा परपोड़ी वाले ने भगवान श्री कृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की कथा सुनाई। और जब सुदामा का भजन गीत गाया गया तो भक्तों की आंखें नम हो गई। छह साल के आराध्य कुमार सुदामा वेशभूषा में अपनी अभिनय से सभी भक्तों का मन मोह लिया। श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में श्रद्धालुओं ने दिव्य भक्ति और आध्यात्मिक अनुभूति का अनुभव किया। प्रसिद्ध कथावाचक कृष्ण धर दीवान ने सुदामा चरित्र की भावपूर्ण कथा सुनाई जिसने श्रोताओं को भक्ति, विनम्रता और सच्ची मित्रता का गहरा संदेश दिया। कथा के इस विशेष प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण और उनके बालसखा सुदामा की मित्रता को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया। जब निर्धन सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे, तो उन्होंने अपने आत्मसम्मान के साथ केवल कुछ मुट्ठी चावल ही भेंट में लिए। भक्त की भावना को प्रधानता देते हैं भगवान: पं. कृष्णधर कथावाचक ने बताया कि सुदामा चरित्र श्रीमद्भागवत का वह भाग है, जो हमें यह सिखाता है कि भगवान अपने भक्त की भावना को ही प्रधानता देते हैं, भेंट या वैभव को नहीं। सुदामा की निश्छल भक्ति, नम्रता और मित्रता की मिसाल आज भी युगों-युगों तक प्रेरणा देती है। इस अवसर पर नन्हें बच्चों ने श्रीकृष्ण और सुदामा की वेशभूषा धारण की थी। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी रही।

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