कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील के बम्हनी पंचायत, मध्य करौंदी गांव से लगभग 60 आदिवासी परिवार बुधवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। इन भूमिहीन परिवारों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर घास की जमीन पर पट्टे की मांग की है, जिस पर वे वर्ष 2005 से खेती कर रहे हैं। आदिवासी परिवारों का कहना है कि वे पिछले दो दशकों से इन जमीनों पर खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं, लेकिन उनके पास इसका कोई वैध सरकारी दस्तावेज नहीं है। हनुमान सिंह गौड़ ने बताया कि गांव के लगभग 60 आदिवासी परिवार पूरी तरह भूमिहीन हैं और यह खेती ही उनके जीवनयापन का एकमात्र साधन है। स्थायी पट्टा न होने के कारण उन्हें हर पल बेदखली का डर सताता रहता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने पट्टे की मांग की है। इससे पहले भी कई बार तहसील स्तर पर और जनसुनवाई में आवेदन दिए गए, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। थक-हारकर इन परिवारों ने अब सामूहिक रूप से कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है। उनकी मुख्य मांग है कि घास की जमीन पर काबिज इन 60 भूमिहीन परिवारों को तत्काल ‘वनाधिकार पट्टा’ या किसी सरकारी योजना के तहत मालिकाना हक दिया जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि वर्षों से की जा रही खेती के आधार पर उनका नाम राजस्व दस्तावेजों में दर्ज किया जाए और पट्टे की प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें जमीन से बेदखल न किया जाए। आदिवासी समूहों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल, कलेक्टर कार्यालय ने ज्ञापन स्वीकार कर मामले की जांच का आश्वासन दिया है।


