भास्कर न्यूज | गिरिडीह गिरिडीह कोल माइनिंग क्षेत्र में कोयला चोरी का संगठित गिरोह बेखौफ होकर सक्रिय है। सेंट्रलपिट रेलवे कोल डंप यार्ड से रेलवे वैगनों में लदे कोयले को गिरिडीह रेलवे स्टेशन तक पहुंचाने के दौरान रैक पर चढ़कर चोर रोज कोयला उतार लेते हैं। एक रैक से करीब 20 टन कोयला चोरी किया जा रहा है। हर दिन एक-दो रैक यहां से निकलती है। जैसे ही कोयले से लदी रैक साइडिंग से निकलती है और रास्ते में गति धीमी होती है तो चोरों का गिरोह अलग-अलग जगहों पर सक्रिय हो जाता है। कुछ लोग चलते वैगनों पर चढ़कर कोयला नीचे फेंकते हैं, जबकि, अन्य लोग रेलवे लाइन के किनारे उसे इकट्ठा करते हैं। चोरी के दौरान विरोध करने पर सीसीएल के सुरक्षा कर्मियों पर पत्थरबाजी और झड़प की घटनाएं भी सामने आई हैं। रेलवे लाइन के दोनों ओर कई स्थानों पर चोरी किए गए कोयले के ढेर दिखाई देते हैं, जिनकी संख्या करीब 200 है। चोरी का कोयला झाड़ियों में छिपाकर बाद में बाइक और साइकिल सवारों के जरिए शहर के अंदर होते हुए बेंगाबाद, गांडेय के रास्ते अन्य जगह पर सक्रिय कोल तस्करों के डीपो मंे पहंुचाया जा रहा है। वहीं, सीसीएल के सुरक्षा अधिकारी नकुल कुमार नायक ने बताया कि सेंट्रलपिट से गिरिडीह रेलवे स्टेशन तक कोयला लदी रैक को पूरी तरह स्काउट कर ले जाया जा रहा है, ताकि किसी भी स्थान पर कोयला चोरी न हो सके। रेलवे रैक से कोयला उतारते चोर। इन इलाकों में सक्रिय है गिरोह मोती महल, बुढ़ियाखाद, मुर्गियाटेंगरी, बरवाडीह, मंगरोडीह तालाब, गांधी गली और झरियागादी के इलाके कोयला चोरी के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। इन स्थानों पर मौका मिलते ही चोर रेलवे वैगनों पर चढ़कर बेखौफ होकर कोयला उतार लेते हैं। सीसीएल के सुरक्षाकर्मी सड़क मार्ग से रैक की निगरानी करते हैं, जबकि इसी दौरान रेलवे लाइन के किनारे चोरों की गतिविधियां जारी रहती हैं। पटरी पर ग्रीस लगाकर धीमी कर देते हैं रैक कहीं-कहीं कोयला चोर रैक को रोकने या उसकी रफ्तार कम करने के लिए रेलवे पटरी पर ग्रीस लगा देते हैं। ग्रीस लगे हिस्से में इंजन पहुंचते ही उसकी गति काफी धीमी हो जाती है, जिसका फायदा उठाकर तस्कर वैगनों पर चढ़ जाते हैं और कोयला नीचे गिरा देते हैं। बीते 31 दिसंबर की रात बरवाडीह के पास इसी तरह की घटना हुई थी। जब सीसीएल के सुरक्षाकर्मियों ने चोरों को रोकने का प्रयास किया, तो उनके ऊपर जमकर पत्थरबाजी की गई।


