शहर के पार्कों, मॉर्निंग वॉक ट्रैक और व्यस्त सड़कों के बाहर इन दिनों गिलोय, व्हीट ग्रास और करेले का जूस खुलेआम बिक रहा है। हर बीमारी का इलाज, शुगर से लेकर कैंसर तक में फायदेमंद जैसे दावे करते हुए विक्रेता राहगीरों को रोककर जूस पिलाने लगे हैं। बिना किसी मेडिकल सलाह, लाइसेंस या स्वच्छता मानकों के तैयार यह जूस लोग सेहत सुधारने की उम्मीद में रोजाना पी रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि आयुर्वेदिक चीज भी गलत मात्रा, दूषित पानी और साफ-सफाई की कमी के कारण दवा जहर बन सकती है। इससे पेट संक्रमण, एलर्जी, उल्टी-दस्त और यहां तक कि पॉइजनिंग जैसे मामले भी सामने आ रहे हैं। शहर में खुलेआम चल रहे इन जूस स्टॉल्स की न तो फूड सेफ्टी और न ही लाइसेंस की जांच हो रही है। जूस स्टॉल्स की न तो फूड सेफ्टी, न ही लाइसेंस की जांच केस 1 : जूस बना पॉइजनिंग की वजह: एक 52 साल के व्यक्ति रोज सुबह पार्क के बाहर व्हीट ग्रास जूस पीने लगे थे। विक्रेता ने इसे चमत्कारी बताया था। कुछ ही दिनों में उन्हें तेज चक्कर, पसीना और कमजोरी महसूस होने लगी। हालत बिगड़ने पर परिवार उन्हें निजी अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने फूड पॉइजनिंग बताई। जांच में सामने आया कि जूस दूषित था। व्हीट ग्रास पुराना और मात्रा जरूरत से ज्यादा थी। केस 2 : सेहत सुधारने चली महिला को उल्टियां और डिहाइड्रेशन : 35 वर्षीय महिला ने वजन और स्किन सुधारने के लिए सड़क किनारे बेचा जा रहा जूस पीना शुरू किया। उसे उल्टियां होने लगीं। दो दिन में डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखने लगे। डॉक्टर ने बताया कि ये जूस हर किसी को माफिक नहीं आता। गंदे बर्तन, बिना धुले पत्ते और खुले में रखा जूस पेट को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। केस 3 : पेट दर्द और इंफेक्शन ने रोजमर्रा की जिंदगी बिगाड़ी: 28 वर्षीय युवक ने सोशल मीडिया पर देखे दावों से प्रभावित होकर डिटॉक्स के नाम पर मिक्स जूस पीना शुरू किया। कुछ ही दिनों में पेट दर्द, गैस और दस्त की शिकायत बढ़ गई। जांच में संक्रमण पाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि खुले में बिकने वाले जूस में बैक्टीरिया पनपने का खतरा ज्यादा होता है। किसी भी रामबाण इलाज पर भरोसा खतरनाक शहर में सेहत के नाम पर जूस खुलेआम बेचे जाने से स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा खड़ा हो गया है। पॉइजनिंग, डायरिया, तेज पेट दर्द और इंफेक्शन के कई केस सामने आए हैं, जिनकी एक बड़ी वजह बिना जांच और बिना जरूरत लंबे समय तक ऐसे जूस का सेवन है। गिलोय, व्हीट ग्रास, घीया और करेला आयुर्वेदिक औषधियां जरूर हैं, लेकिन यह हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होतीं। खासतौर पर लिवर और किडनी से जुड़ी समस्या वाले लोग, प्रेग्नेंट महिलाएं और पहले से दवाएं ले रहे मरीज अगर बिना सलाह इनका सेवन करते हैं तो उनकी हालत बिगड़ सकती है। सेहत सुधारने के लिए जूस पीना गलत नहीं है, लेकिन बिना जानकारी, बिना डॉक्टर की सलाह और बिना किसी निगरानी के यह ट्रेंड शहर के लिए एक नई स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। किसी भी रामबाण इलाज के दावों पर आंख बंद कर भरोसा करना लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है।


