गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना में चल रहे यूथ फेस्टिवल में वीरवार का दिन पूरी तरह थिएटर प्रस्तुतियों की रचनात्मक ऊर्जा से भरा रहा। माइम और स्किट के माध्यम से स्टूडेंट्स ने समाज, राजनीति और पर्यावरण से जुड़े उन मुद्दों पर रोशनी डाली जो आज भी लोगों के जीवन को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं। मंच पर युवाओं की संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति इतनी मजबूत दिखी कि दर्शक उनकी हर प्रस्तुति से भावनात्मक रूप से जुड़ते चले गए। खालसा कॉलेज ऑफ वेटरनरी एंड एनीमल साइंस के छात्रों ने अपने एक्ट के जरिए बॉडी बिल्डर और एक्टर वरिंदर सिंह घुमन को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। स्किट की शुरुआत कॉमेडी से भरी हल्की-फुल्की शैली में हुई, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ी, प्रस्तुति ने एक गहरा मोड़ लिया और मेडिकल लापरवाही जैसे गंभीर मुद्दे को सामने लाकर दर्शकों का ध्यान खींचा। परिवार द्वारा वरिंदर घुम्मण की मौत को एक सवाल नहीं, बल्कि सवालों का समंदर बताए जाने के संदर्भ को पकड़ते हुए स्टूडेंट्स ने ठीक उसी तरह मेडिकल स्टाफ की अनदेखी और गैर-जिम्मेदारी को दिखाया कि कैसे छोटी-सी लापरवाही एक जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। युवा मंच पर आते हैं तो मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की आवाज भी बनते हैं स्किट में लविशा गुप्ता ने नर्स सोनिया, रिपोर्टर और गर्भवती लड़की की भूमिकाएं निभाकर दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। अनामिका लूंबा ने बीबी के रूप में अपनी मजबूत पकड़ दिखाई, जिनकी संवाद अदायगी ने कहानी को गहराई दी। दीपांशु अरोड़ा नकली डॉक्टर के किरदार में मंच पर छाए रहे और उनकी भूमिका ने मेडिकल व्यवस्था की खोखली परतों को व्यंग्यात्मक ढंग से उजागर किया। रुद्राक्ष ने वार्ड बॉय की भूमिका को सहजता से निभाया, जिससे स्किट में वास्तविकता का पुट और बढ़ गया। वहीं भ्रमरूप सिंह ने भूपा, असली डॉक्टर की दोहरी भूमिका निभाई। हरकीरत सिंह ने सफाई वाले, लड़की के पति की भूमिका निभाई। पूरा माहौल थिएटर की शक्ति, सामाजिक चेतना व युवाओं की कला के सम्मिश्रण से बना रहा। फेस्टिवल का यह दिन प्रमाण बन गया कि जब युवा मंच पर आते हैं, तो वे सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की आवाज भी बनते हैं।


