भास्कर न्यूज | खरसावां खरसावां मुख्यालय के सभागार में सरायकेला-खरसावां के एलडीएम वरुण चौधरी की अध्यक्षता में केसीसी आवेदन प्राप्ति के लिए एक शिविर का आयोजन किया गया। खरसावां प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रधान माझी के उपस्थिति में आयोजित इस शिविर में विभिन्न गांवों से पहुंचे 30 किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के लिए आवेदन दिया। मौके पर श्री चौधरी ने कहा कि केसीसी योजना किसानों को उनके कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त और समय पर ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। किसानों को अत्यंत रियायती दर पर ऋण उपलब्ध होता है। उन्होंने कहा कि एक लाख तक का लोन मे एलपीसी की जरूरत नहीं है। एक लाख से अधिक लोन लेने वाले किसानों का एलपीसी करवाना होगा। एलडीएम ने शतप्रतिशत किसानों को केसीसी का लाभ दिलाने का निर्देश दिया। जबकि श्री माझी ने कहा कि केसीसी के माध्यम से किसानों को कम ब्याज दर पर समय पर ऋण, खेती से जुड़ी आवश्यकताओं की पूर्ति, बीज, खाद, कीटनाशक एवं अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता में सुविधा मिलती है। साथ ही फसल उत्पादन के दौरान किसानों को आर्थिक संबल मिलता है।उन्होंने ऐसे किसानों, जिनके अभी तक केसीसी नहीं कराया हैं, उन्हें अविलंब केसीसी करवाने के लिए प्रेरित किया तथा प्रक्रिया को सरल बताते हुए कहा कि किसान अब कृषिका एप के माध्यम से भी केसीसी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे किसानों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और प्रक्रिया पारदर्शी एवं त्वरित होगी। इस दौरान मुख्य रूप से एलडीएम वरुण चौधरी, बीडीओ प्रधान माझी, बीएओ इंद्रकुंड मोदक, बीटीएम रतन टोप्पो, एटीएम सुखलाल सोय, विभिन्न बैंकों के प्रबंधक, कृषक मित्र उपस्थित थे। सरायकेला| राजनगर प्रखंड सह अंचल अंतर्गत केंद्रमुंडी पंचायत के बिदरी गांव स्थित धोबोडूंगरी क्षेत्र में स्टोन माइंस व क्रशर मशीन स्थापित और संचालित किए जाने के प्रस्ताव का स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया है। इस संबंध में मेसर्स लीडिंग कंस्ट्रक्शन द्वारा जिला खनन विभाग में आवेदन दिए जाने की जानकारी मिलने के बाद ग्रामसभा ने एकजुट होकर इसका प्रतिवाद शुरू किया। स्थानीय ग्रामसभा मानकी मुंडा मोला बोदरा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए उक्त परियोजना की अनुमति नहीं देने की मांग की। मोला बोदरा ने बताया कि जिस भूखंड पर स्टोन माइंस एवं क्रशर मशीन स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है, उसके आसपास खेती योग्य भूमि, जंगल व घनी आबादी वाला क्षेत्र मौजूद है। यह इलाका पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित (शेड्यूल) क्षेत्र में आता है, जहां आदिवासी समुदाय की आजीविका, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि पत्थर खनन और क्रशर मशीनों के संचालन से वायु प्रदूषण बढ़ेगा, धूल के कारण फसलें प्रभावित होंगी, मिट्टी की उर्वरता कम होगी तथा ध्वनि प्रदूषण से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होंगी। ग्रामसभा के माध्यम से सभी ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि धोबोडूंगरी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का लघु खनन कार्य या क्रशर प्लांट स्थापित नहीं होने दिया जाएगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान बिदरी गांव के सोमाय सिदू, विष्णु बोदरा, सोमराय बोदरा, गंगाराम बोयपाई, सोदा सोय, राम सोय, दीपक महतो सहित कई ग्रामीण उपस्थित थे।


