स्पीकर और माइक लेकर पानी की टंकी पर चढ़ा युवक:धरना देने की अनुमति नहीं मिलने से है नाराज, कागज फेंककर नीचे खड़े लोगों को बताया कारण

अलवर में आरटीआई एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता हैदर अली माइक और स्पीकर लेकर पानी की टंकी पर चढ़ गया। उसके पास एक कागजों की पोटली भी है। हैदर अली को प्रशासन की ओर से धरना देने की अनुमति नहीं मिली, जिसको लेकर वह नाराज है। करीब 3 घंटे के बाद हैदर नीचे आया। उसके बाद पुलिस कोतवाली लेकर चली गई। हैदर अली शुक्रवार दोपहर में बिजली घर चौराहे के पास पानी की टंकी पर चढ़ गया। पता चलने पर मौके पर भीड़ जमा हो गई। उसने टंकी के ऊपर से कागज फेंककर लोगों को टंकी पर चढ़ने का कारण बताया। लिखा कि उसने प्रशासन से धरने की अनुमति मांगी थी, लेकिन प्रशासन ने उसे अनुमति नहीं दी। यह बात वह माइक से भी बोलता रहा। वह करीब 2 घंटे तक टंकी पर चढ़ा रहा। डीएसपी और कोतवाल आसपास से भीड़ को कम करने के प्रयास में लगे रहे। लिखा- धरना देने की अनुमति नहीं दी हैदर अली ने लिखा – मैं हैदर अली आरटीआई एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता हूं। यूपीएससी की तैयारी छोड़ देशहित में सामाजिक और शिक्षित बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को लेकर सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत राजस्थान के विभागों में लाखों रिक्त पदों की सूचना प्राप्त की है। उसके अनुसार शिक्षा विभाग में 1 लाख 14 हजार 597, पुलिस में 24 हजार 847, रोडवेज में 11518, राजस्व में 4090, कृषि में 3429, वन विभाग में 2896 सहित अन्य विभागों में पद रिक्त हैं। शिक्षित बेरोजगार युवाओं के हितों में मैं शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करना चाहता हूं, जिसकी अनुमति के लिए एडीएम शहर को आवेदन किया था। हैदर अली ने कहा कि मैंने 5 बार आवेदन किया, लेकिन हर बार मना कर दिया गया। अनुमति नहीं देने का कोई कारण नहीं बताया गया। जानबूझकर उल्लंघन करते हुए मेरे शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करने के मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन किया है। अनुमति नहीं मिलने से तंग आकर पानी की टंकी पर चढ़ने को मजबूर हुआ। रोड पर भी जाम लगा रहा युवक के पानी की टंकी पर चढ़ने के समय रोड पर भी जाम लगा रहा। काफी संख्या में आमजन की भीड़ जुट गई। हर कोई यह जानना चाह रहा था कि पानी की टंकी पर क्यों चढ़ा है। बीच-बीच में हैदर ने टंकी के ऊपर से कागज फेंके। जिसके जरिए उसने बताया कि पानी की टंकी पर चढ़ने की वजह यही है कि उसे प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी।

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