प्रदेश में राइजिंग राजस्थान को 1 साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। 1 साल में हैल्थ और एजुकेशन के 40-44 प्रतिशत प्रोजेक्ट पूरे हुए हैं। वहीं ट्रांसपोर्ट के 13 में से 1 ही एमओयू पूरा हुआ है, वहीं स्पोर्ट्स के 29 एमओयू किए गए थे, जिनमें से महज 1 प्रोजेक्ट धरातल पर उतरा है। उद्योग विभाग ने राइजिंग राजस्थान समिट के तहत 35 लाख करोड़ के 11,010 एमओयू किये थे, जिनमें से 3780 प्रोजेक्ट 1 साल में पूरे हुए हैं, जो करीब 8 लाख करोड़ के हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा यूडीएच के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। पुराने विवादों के चलते निजी यूनिवर्सिटी में देरी, जांच के बाद प्रोजेक्ट धरातल पर आएंगे राइजिंग राजस्थान में उच्च शिक्षा में कई निजी यूनिवर्सिटी खोलने के लिए भी एमओयू किए गए थे, लेकिन पिछली सरकार के समय सीकर में एक निजी यूनिवर्सिटी की बिना बिल्डिंग बने ही बिल विधानसभा में आने और तीन यूनिवर्सिटी के बिल राजभवन में अटकने के बाद सरकार ने सख्ती दिखाई है। पूरी जांच पड़ताल और नॉर्म्स पूरे होने के बाद ही यह प्रोजेक्ट धरातल पर आएंगे। ऐसे में यूनिवर्सिटी में देरी हो रही है। सामान्य कॉलेजों के बजाय टेक्नीकल एजुकेशन पर फोकस प्रदेश में सामान्य कॉलेजों के 67, डीएसईई के 22, आईटी, साइंस एंड टेक्नोलॉजी के 97, स्कूल एजुकेशन के 209, हायर एंड टेक्नीकल एजुकेशन के 307, संस्कृत एजुकेशन के 12 एमओयू हुए थे। 714 प्रोजेक्ट में से 2962 करोड़ के 316 प्रोजेक्ट पूरे हो गए हैं। कॉलेज एजुकेशन के अब तक 20 प्रोजेक्ट धरातल पर उतरे हैं, लेकिन बीटेक व अन्य टेक्नीकल कोर्स कराने वाले संस्थान 221 तैयार हो गए हैं। सामान्य शिक्षा की बजाय टेक्नीकल संस्थान के एमओयू भी ज्यादा हैं आैर पूरे होने का प्रतिशत भी। हैल्थ के 211 प्रोजेक्ट पूरे; हैल्थ सेक्टर में 528 में से 211 प्रोजेक्ट जमीन पर उतरे हैं। इनमें मेडिकल एजुकेशन के 49 प्रोजेक्ट थे आैर उनमें से 6055 करोड़ के 14 पूरे हो गए हैं। जयपुर में इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस व हॉस्पिटल तैयार हो गए हैं। आयुष सेक्टर में भी 1 प्रोजेक्ट शुरू हो गया।


