स्मार्ट आंगनबाड़ी कार्यक्रम: बच्चों की नींव मजबूत करने के लिए अभिभावकों को होमवर्क ग्रुप से जोड़ा

भास्कर संवाददाता | श्रीगंगानगर महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनबाड़ी केंद्रों को अपग्रेड करने के लिए लगातार प्रयासरत है। अब स्मार्ट आंगनबाड़ी कार्यक्रम के तहत केंद्रों में आने वाले बच्चों के अभिभावकों को होमवर्क ग्रुप (व्हॉटसअप ग्रुप )से जोड़ा गया है। इस नवाचार के माध्यम से अभिभावक अब अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे। यह पहल महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से बच्चों की नींव को मजबूत करने के लिए की गई है। जिले में 2004 आगनबाड़ी केन्द्रों में करीब एक लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें से 3 से 6 वर्ष के करीब 31 हजार बच्चों को शाला पूर्व शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसिलए अब नए कार्यक्रम के तहत अभिभावकों को तकनीकी माध्यमों से जोड़कर उनकी भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए केन्द्रों पर आने वाले बच्चों के माता-पिता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को होमवर्क ग्रुप में जोड़ा गया है। यहां पर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए डिजिटल गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिन्हें अभिभावक घर पर बच्चों के साथ मिलकर कर सकते हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार यह व्यवस्था स्मार्ट आंगनबाड़ी कार्यक्रम के तहत की गई हैं। इसमें बच्चों की शिक्षण गतिविधियों को अधिक रचनात्मक और रोचक बनाने के लिए समुदाय को सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसके अलावा, मिशन बुनियाद के तहत सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। इससे सामुदायिक भागीदारी और सकारात्मक बदलाव की उम्मीद: स्मार्ट आंगनबाड़ी कार्यक्रम और होमवर्क के माध्यम से बच्चों, अभिभावकों और कार्यकर्ताओं को शिक्षा, पोषण और सामुदायिक भागीदारी में सकारात्मक बदलाव होने की उम्मीद है। इन प्रयासों से यह सुनिश्चित होगा कि बच्चों का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और संज्ञानात्मक विकास एक समग्र दृष्टिकोण के साथ हो सके। महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक सुमित्रा बिश्नोई ने बताया कि बच्चों के सीखने और विकास में अभिभावकों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया है। इसके तहत उनके सहयोग की आवश्यकता को समझते हुए अभिभावकों के ग्रुप बनाकर उन्हें आंगनबाड़ियों में होने वाली गतिविधियों से जोड़ा गया है। इससे वे अपने बच्चों की शिक्षा और समग्र विकास में सहयोग देने में सक्षम हो सकें। यह नई व्यवस्था बच्चों के लिए बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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