स्लॉटर हाउस:नाम का जीरो वेस्ट… ताला लगने के 13 दिन बाद भी फैली सिस्टम की सड़ांध

जिंसी में जीरो वेस्ट मॉडर्न स्लॉटर हाउस पर 8 जनवरी को ताला लगने के 13 ​दिन बाद भी यहां बदबू फैली है। कुछ देर खड़ा रहना भी मुश्किल है। यह वही प्रोजेक्ट है, जिसके संचालन से पहले दावा किया गया था कि यहां से खून की एक बूंद भी बाहर नहीं जाएगी और पूरा सिस्टम जीरो वेस्ट पर आधारित होगा। मंगलवार को भास्कर टीम यहां पहुंची तो स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां भारी मात्रा में खून और जानवरों का वेस्ट खुले में पड़ा रहता था। स्लॉटर हाउस से निकलने वाली गाड़ियों से खून टपकने की शिकायतें भी सामने आती रहीं। शिकायतों के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने निरीक्षण किया और संचालन को नियमानुसार बताते हुए क्लीनचिट दे दी। जबकि, हकीकत यह रही कि स्लॉटर हाउस का वेस्ट करीब 14 किलोमीटर दूर आदमपुर खंती स्थित रेंडरिंग प्लांट भेजा जाता था। बदबू की वजह- पीछे के शेड में सड़ते अवशेष
मुख्य प्लांट के पीछे एक बड़ा शेड बना है। यहां स्लॉटरिंग के बाद जानवरों के अवशेष जमा रहते थे। विशेषज्ञों के अनुसार जानवरों के अवशेष करीब 5 घंटे में सड़ने लगते हैं। यही अवशेष परिसर और आसपास के इलाकों में फैल रही बदबू का प्रमुख कारण बने। इससे स्थानीय लोग परेशान थे। 33 करोड़ की परियोजना, जीरो वेस्ट सिर्फ कागजों में
नगर निगम की पीपीपी परियोजना के तहत लाइव स्टॉक फूड प्रोसेसर्स कंपनी ने 33 करोड़ रुपए की लागत से इस मॉडर्न स्लॉटर हाउस का निर्माण किया था। यहां वेस्ट मटेरियल रेंडरिंग प्लांट और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने का दावा किया गया। कहा गया कि काटे जाने वाले जानवर की खाल, मांस, हड्डी और खून तक का उपयोग होगा। जबकि, वास्तविकता यह रही कि वेस्ट को दूसरी जगह भेजना पड़ता था। एसआईटी की जांच के बिंदु तय… स्लॉटर हाउस में गोवंश काटने के मामले की जांच के लिए एसआईटी बनी है। इसमें एसीपी उमेश तिवारी, शाहपुरा टीआई लोकेंद्र सिंह ठाकुर और जहांगीराबाद टीआई मान सिंह चौधरी हैं। मंगलवार को पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा ने अफसरों के साथ बैठक की। उन्होंने बताया कि बैठक में एसआईटी की जांच के बिंदु तय कर लिए हैं।

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