स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितता का आरोप:हिंदी टाइपिंग परीक्षा बिना पास किए अपात्रों को दिया प्रमोशन, एनएसयूआई ने उठाई जांच की मांग

बिलासपुर में एनएसयूआई ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश सचिव रंजेश सिंह के नेतृत्व में एनएसयूआई प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय अधिकारियों को शिकायती पत्र सौंपा है। संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं और सीएमएचओ को दिए छह सूत्रीय ज्ञापन में कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। एनएसयूआई का आरोप है कि अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर अपात्र लोगों को नौकरियां दी गई। कर्मचारियों को दो वर्ष में हिंदी टाइपिंग परीक्षा पास करनी थी। पांच साल बीत जाने के बाद भी वे परीक्षा पास नहीं कर पाए। फिर भी उन्हें न केवल सेवा में बनाए रखा गया बल्कि पदोन्नति भी दी गई। पदोन्नति में नियमितता का आरोप पदोन्नति प्रक्रिया में भी अनियमितता का आरोप है। वरिष्ठता सूची में हेराफेरी कर कनिष्ठ कर्मचारियों को आगे किया गया। कुछ मामलों में बिना सूची जारी किए मनचाहे कर्मचारियों को प्रमोशन दे दिया गया। सूचना के अधिकार में मांगी गई जानकारी में भी विभाग ने झूठी और भ्रामक जानकारी दी। आरटीआई पोर्टल अभी तक शुरू नहीं हुआ है। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि 15 दिनों के भीतर इन मामलों में कार्रवाई नहीं हुई तो सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ विभागीय कार्यालय का घेराव किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में पुष्पराज साहू, करण यादव, प्रदीप सिंह, सुमित सिंह ठाकुर, मीत सोनवानी, वेद राजपूत, सुदामा साहू, अंकुश और सूर्यांश तिवारी शामिल थे। दोषियों पर कार्रवाई नहीं होने पर दी आंदोलन की चेतावनी रंजेश सिंह ने स्पष्ट किया कि सभी आरोपों से संबंधित दस्तावेज उनके पास उपलब्ध हैं, जिन्हें वे जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को सौंप सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा में शिकायतों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो एनएसयूआई चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी।

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