शंकर लाल तंबोली। उम्र 84 साल। जल संसाधन विभाग से सेवानिवृत्त क्लर्क। ये कोई जाना-पहचाना नाम नहीं हैं। लेकिन इनमें कुछ खास है। और वह है इनका जुनून। बीटीआई ग्राउंड के एक कोने में ये रोज सुबह ना सिर्फ खुद पैरेलल बार पर कई तरह के व्यायाम करते दिख जाएंगे, बल्कि अपनी तरह के दूसरे बुजुर्गों को भी पैरेलल बार पर कठिन अभ्यास कराते हैं। यह सिलसिला पिछले 21 साल से लगातार जारी है। शंकर नगर के इस इलाके में इनकी लोकप्रियता धीरे-धीरे इस कदर बढ़ी कि अब आसपास के इलाकों के ना सिर्फ बुजुर्ग बल्कि सेना और पुलिस भर्ती की तैयारी करने वाले युवा भी अभ्यास करने नियमित आने लगे। आज लगभग 150 लोग प्रतिदिन यहां अभ्यास करते हैं। इसके लिए वे एक रुपया भी नहीं लेते। खुद को फिट रखने का ऐसा जुनून कैसे? शंकर लाल कहते हैं, जब एक बुजुर्ग बीमार होता है तो उसके साथ पूरा परिवार परेशानी उठाता है। मैं नहीं चाहता कि बीमार पड़कर किसी पर निर्भर हो जाऊं। उन्हें पहली बार यह एहसास 2001 में हुआ जब सेवानिवृत के बाद बीमारियां जकड़ने लगीं। तब युवावस्था में एक अधिकारी से सीखे गए इस अभ्यास को उन्होंने नियमित व्यायाम के रूप में अपना लिया। फिर ख्याल आया कि मेरी तरह परेशानी उठाने वाले और भी लोग होंगे। और वर्ष 2004 से वे दूसरों को अभ्यास कराने लगे। खास बात यह है कि वे पिछले 22 साल से कभी बीमार नहीं पड़े। उनके पुत्र नितिन तंबोली पेशे से डॉक्टर हैं। उन्होंने भी पिता का पूरा साथ दिया। चंदा कर लगवाए पैरलल बार : जब बीटीआई ग्राउंड में पहले एक ही पैरलल बार था। जब यहां अभ्यास करने वालों की संख्या बढ़ने लगी तब शंकर लाल ने लोगों से चंदा इकट्ठा कर वहां 6 और बार लगवाए। अब एक साथ 20-30 लोग व्यायाम करते हैं। सुबह 6 से 10 बजे तक लोगों की भीड़ लगी रहती है। प्रेरणादायी… निशुल्क सेवा
शंकर लाल की उम्र के किसी दूसरे बुजुर्ग के लिए पैरलल बार पर सर नीचे करके लटकना तो दूर उस पर चढ़ना ही मुश्किल है। हालांकि शंकर लाल तो किसी 10-12 साल के बच्चे की तरह इस पर अभ्यास करते हैं। वे ना सिर्फ बार पर गोल घूम जाते हैं बल्कि इस पर शीर्षासन भी कराते हैं। शंकर लाल के साथ अब 20 लोगों की टीम भी है। इसके सदस्य निशुल्क सेवा देते हैं। यहां वे सुनने की क्षमता और आंखों की रोशनी बढ़ाने, पाइल्स से छुटकारा, घुटनों और जोड़ों के दर्द, थॉयराइड, पेट की तकलीफों को दूर करने से जुड़े व्यायाम का भी अभ्यास कराते हैं।


