हड़ताल से वेलनेस सेंटरों में ओपीडी बंद रही इमरजेंसी सेवाएं ठप, टीकाकरण प्रभावित

भास्कर न्यूज | कवर्धा कबीरधाम जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 467 संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। पांचवें दिन भी हड़ताल जारी रहा। इसके चलते अब ग्रामीण इलाकों के उप-स्वास्थ्य केंद्रों (हेल्थ वेलनेस सेंटर) में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से बंद पड़ गई है। इन सेंटरों में इमरजेंसी सेवाएं ठप हैं, वहीं शुक्रवार को टीकाकरण का दिन था वह भी नहीं हुआ। हालत, इतनी खराब हो चुकी है कि अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर भी इसका असर दिखने लगा है। हड़ताल से सबसे ज्यादा समस्या ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों पर पड़ रहा है। जिले के ग्रामीण इलाकों में 125 से ज्यादा उप-स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। सभी केंद्रों में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी ही सेवाएं दे रहे हैं। उनके हड़ताल पर रहने से ओपीडी बंद है। अस्पताल तो खुल रहे हैं, लेकिन मरीजों की जांच व उपचार नहीं हो पा रही है। हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से बिगड़ने लगी है। पंडरिया ब्लॉक के दूरस्थ वनांचल गांव चियाडाड़ में हेल्थ वेलनेस सेंटर संचालित है। 24 घंटे सेवाएं देने वाला यह सेंटर शुक्रवार को बंद मिला। वहीं जिला मुख्यालय कवर्धा से लगे ग्राम बम्हनी में सब सेंटर ड्रेसर के भरोसे है। यह सेंटर खुल तो रहा है, लेकिन मरीजों का इलाज करने के लिए सीएचओ नहीं है। बोड़ला ब्लॉक के दूरस्थ तरेगांव जंगल व दलदली क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हैं। नियमित भर्ती में आरक्षण, अनुकंपा नियुक्ति व अन्य मांगों कोे लेकर डटे हैं छत्तीसगढ़ एनएचएम कर्मचारी संघ अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर हैं। संघ के जिलाध्यक्ष शशिकांत शर्मा ने बताया कि मांगों में संविलियन, स्थायीकरण, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, ग्रेड पे निर्धारण, पारदर्शी कार्य मूल्यांकन, लंबित 27% वेतन वृद्धि, नियमित भर्ती में आरक्षण, अनुकंपा नियुक्ति, मेडिकल व अन्य अवकाश, स्थानांतरण नीति और 10 लाख रुपए का कैशलेस चिकित्सा बीमा शामिल है। पिछले 20 वर्षों से कर्मचारियों को सिर्फ आश्वासन मिल रहा एनएचएम कर्मचारियों का कहना है कि वे बीते 20 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं। कोविड-19 जैसे संकट काल में भी उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दीं, लेकिन उन्हें अब तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है। अन्य राज्यों की तुलना में छग के कर्मचारियों को केवल आश्वासन ही मिला है।

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