प्रदेश के आगामी बजट को जन-केंद्रित और धरातल की जरूरतों से जोड़ने के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में एक उच्च स्तरीय सुझाव बैठक आयोजित की गई। प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में झुंझुनूं के भविष्य की तस्वीर उकेरी गई। स्वास्थ्य, कृषि, तकनीक और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर प्रतिनिधियों ने खुलकर अपनी राय रखी, जिसे मंत्री ने सरकार के ‘विजन-2030’ की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। झुंझुनूं जिले के प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत ने बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का आगामी बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होगा। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री का संकल्प है कि बजट निर्माण में जनता की सीधी भागीदारी हो। झुंझुनूं से प्राप्त ये सुझाव जिले के औद्योगिक विकास, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और युवा सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करेंगे। हम ‘राइजिंग राजस्थान’ के माध्यम से जिले में निवेश और रोजगार के नए द्वार खोलने की दिशा में काम कर रहे हैं। 1. चिकित्सा: ‘कोटा मॉडल’ और बुनियादी ढांचे पर जोर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए ‘कोटा मॉडल’ लागू करने का सुझाव प्रमुखता से उठा। आरजीएचएस (RGHS) के तहत निजी अस्पतालों के रुके हुए भुगतान और एनओसी प्रक्रिया के सरलीकरण की मांग की गई। चिड़ावा, बगड़ और सिंघाना में ट्रॉमा सेंटर और उपजिला अस्पतालों में विशेषज्ञों की नियुक्ति को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया। 2. उद्योग और तकनीक: रोबोटिक्स से लेकर एयरपोर्ट तक झुंझुनूं को औद्योगिक हब बनाने के लिए दूरगामी सुझाव दिए गए। बबाई में एयरपोर्ट की स्थापना और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) को पूरी क्षमता से पुनः संचालित करना। युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए आईटीआई में रोबोटिक्स और एआई (AI) कोर्स की शुरुआत। जिला स्तर पर ही जीएसटी पंजीकरण का विकेंद्रीकरण और औद्योगिक क्षेत्रों में ड्रेनेज व बिजली की पुख्ता व्यवस्था। 3. कृषि और गौ-सेवा: ‘गोपालन क्रेडिट कार्ड’ की अभिनव पहल खेती और पशुपालन को लाभ का सौदा बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव आए। किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर गोपालन क्रेडिट कार्ड जारी करने और जिले में ‘एग्रो-टूरिज्म’ नीति लागू करने का सुझाव। जैविक खेती के लिए पंजीकरण और भंडारण सुविधा के साथ-साथ चिड़ावा कृषि महाविद्यालय हेतु भूमि आवंटन की प्रक्रिया तेज करने की मांग। 4. महिला सशक्तिकरण: पीरियड लीव और मानदेय वृद्धि आधी आबादी के अधिकारों के लिए प्रतिनिधियों ने मजबूती से पक्ष रखा: कामकाजी महिलाओं के लिए ‘पीरियड लीव’ का प्रावधान और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि। राजीविका मार्ट की स्थापना और संविदा कर्मियों को आयुष्मान योजना के दायरे में लाने का प्रस्ताव। 5. न्याय और प्रशासन: उपभोक्ता कोर्ट और लैब उपभोक्ता आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने सुझाव दिया कि सांध्यकालीन उपभोक्ता कोर्ट की शुरुआत हो और खाद्य सामग्री में मिलावट की जांच के लिए जिला स्तर पर आधुनिक प्रयोगशाला खोली जाए। ये रहे मौजूद इस महत्वपूर्ण मंथन में झुंझुनूं विधायक राजेंद्र भांबू, जिला प्रमुख हर्षिनी कुलहरी, पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी व सुभाष पूनिया, जिला कलक्टर डॉ. अरुण गर्ग और एसपी बृजेश ज्योति उपाध्याय सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।


