प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने और जेटेट परीक्षा नहीं कराए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। जस्टिस आनंद सेन की कोर्ट ने नौ साल से परीक्षा न लेने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने पूछा कि आखिर 2016 के बाद जेटेट का आयोजन क्यों नहीं किया गया। प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सरकार ने जेटेट नियमावली में कहा है कि जिन्होंने 2016 में जेटेट पास की है, उनकी वैधता आजीवन रहेगी। इस पर कोर्ट ने गुरुवार को स्कूली शिक्षा सचिव को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सचिव से पूछा है कि जेटेट का आयोजन कब तक होगा। मालूम हो कि इस मामले में सीटेट पास करने वाले हरिकेष महतो सहित 400 लोगों ने याचिका दाखिल की है। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज और कुशल कुमार ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक नियुक्ति में सिर्फ जेटेट पास करने वालों को ही योग्य माना है। सीटेट और झारखंड के वैसे अभ्यर्थी जो दूसरे राज्य से टेट पास हैं, उन्हें अयोग्य माना है। इसके बाद हाल में ही राज्य सरकार ने नियमावली में संशोधन किया और जेटेट को अनिवार्य कर दिया। नई नियमावली में कहा गया कि वर्ष 2016 में जिन लोगों ने टेट पास किया है, उनके प्रमाणपत्र की वैधता आजीवन रहेगी। प्रार्थियों की ओर से कहा गया कि यह नियम अवैधानिक है । क्योंकि, वर्ष 2016 के बाद राज्य में टेट परीक्षा नहीं हुई है। ऐसे में अब दूसरे अभ्यर्थियों के लिए टेट पास करना मुश्किल हो गया है। प्रार्थी सीटेट पास हैं। ऐसे में वह टेट परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।


