झारखंड हाईकोर्ट आम लोगों की सुरक्षा-सुविधा से जुड़े मामलों को गंभीरता से ले रहा है। दैनिक भास्कर के 7 सितंबर के अंक में प्रकाशित समाचार 15 थानों में कैमरा ही नहीं, 23 थानेदारों ने अपने कक्ष में नहीं लगवाए सीसीटीवी पर स्वत:संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को प्रतिवादी बनाते हुए जवाब मांगा है। दूसरी और चीफ जस्टिस को मिले एक पत्र में जोन्हा फॉल तक की सड़क की बदहाली का जिक्र किया गया था। इसपर भी अदालत ने संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को प्रतिवादी बनाया है। दोनों मामलों की सुनवाई 11 सितंबर को निर्धारित की गई है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने थानों के अंदर और बाहर सीसीटीवी लगाने का आदेश दिया है। हिरासत में होने वाली मौत पर शीर्ष अदालत ने संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया था। इसके बावजूद रांची के थानों में सीसीटीवी कैमरा नहीं लगाया गया। कुछ थाना में बाहरी क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरा लगे हुए हैं,लेकिन थानेदारों के चैंबर में कैमरा नहीं लगा है। इस वजह से थाना के अंदर क्या चल रहा है,इसका खुलासा नहीं हो पाता है। दैनिक भास्कर ने इसकी पड़ताल करती रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका में तब्दील कर दिया है।


