झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए एसटी उम्मीदवार की नियुक्ति मामले में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने हाईकोर्ट के एकल पीठ के आदेश के खिलाफ दाखिल जेपीएससी की अपील (एलपीए) पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले में प्रार्थी द्वारा जमा कराए गए परीक्षा फीस जेपीएससी के अकाउंट में तकनीकी कारणों से क्रेडिट नहीं हो सका था। इस पर हाईकोर्ट की एकल पीठ में प्रार्थी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि चूकी प्रार्थी हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में इंटरव्यू दे चुका है और वह उस परीक्षा में अधिकतम नंबर लाने वाला भी रहा है। कई परीक्षाओं में एसटी अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा फीस भी नहीं लिया जाता है। ऐसे में उसे नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल किया जाए। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने प्रार्थी मनोज कुमार कच्छप की रिट याचिका को स्वीकृत करते हुए जेपीएससी को निर्देश दिया था कि वह चार सप्ताह में प्रार्थी की नियुक्ति करें। इस आदेश के खिलाफ जेपीएससी ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी है। इसमें जेपीएससी की ओर से दलील दी गई कि प्रार्थी ने जब अपना परीक्षा फॉर्म भरा था, उस दौरान जेपीएससी की वेबसाइट का स्टेटस फेल हो गया था। जिससे उसके फीस का पैसा जेपीएससी के अकाउंट में नहीं आया था। इस कारण उन्हें पहले इंटरव्यू में नहीं बुलाया गया था और उनकी नियुक्ति नहीं की जा रही है। मालूम हो कि जुलाई 2018 में जेपीएससी ने नागपुरी भाषा के लिए एसटी उम्मीदवारों के लिए बैकलॉग वैकेंसी के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 4 पदों के लिए विज्ञापन निकाला था। इसके बाद दस्तावेजों की स्क्रूटनी में प्रार्थी को 85 मार्क्स में से 72.10 मार्क्स मिले थे। लेकिन इंटरव्यू लिस्ट जारी होने पर प्रार्थी का नाम उसमें नहीं आया था। जिसके बाद उनकी ओर से हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पार्थी के पक्ष में फैसला सुनाया था।


