बिजली उत्पादन कंपनी के डिंडोलभांठा छिरहुट में स्थित राखड़ बांध में पानी भरने से तटबंध के नीचे पत्थर का हिस्सा धंह गया। इसकी वजह से पानी के साथ राखड़ आसपास के खेतों में पट गया। जिस जगह फूटने की घटना हुई है, वहां सुबह से ही रिसाव हो रहा था। इसके बाद भी अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। शाम को तेजी से राखड़ युक्त पानी बहने लगा, तब अफसर पहुंचे और किनारे बस्ती के 12 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर ठहराया। एचटीपीपी विस्तार पावर प्लांट 500 मेगावाट के लिए कटघोरा ब्लॉक के डिंडोलभांठा छिरहुट में राखड़ बांध बनाया गया है। इसका निर्माण वर्ष 2010-11 में कराया गया है। प्लांट से राखड़ पाइपलाइन के माध्यम से बांध तक भेजा जाता है। गुरुवार शाम को बांध के तटबंध के नीचे पत्थर से की गई पिचिंग के हिस्से में रिसाव हो रहा था। क्षेत्र में लगातार झमाझम बारिश के कारण बांध में पानी भर गया था। पानी निकासी के लिए जगह बनाई जाती है, लेकिन उससे पानी का बहाव कम था। इसकी वजह से पानी के प्रेशर से पत्थर का हिस्सा खिसक गया। इससे पानी के साथ राखड़ भी तेजी से बहने लगा, जो आसपास के खेतों में पट गया। करीब 10 एकड़ खेतों में राखड़ मिश्रित पानी भरा हुआ है। रात के समय इसमें सुधार भी संभव नहीं था। सूचना मिलने पर उत्पादन कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले राखड़ बांध से 200 मीटर दूर स्थित डोडकधरी बस्ती को खाली कराया। यहां 12 परिवारों के 44 लोग रहते हैं। सभी लोगों को डिंडोलभांठा के सामुदायिक और पंचायत भवन में ठहराया गया। ग्रामीण डर की वजह से रातभर सो नहीं पाए। सड़क पर राखड़ पटने से आवाजाही बंद
बांध के नीचे आवाजाही के लिए कच्ची सड़क बनाई गई है। करीब 200 मीटर के हिस्से में राखड़ पट गया है। इस मार्ग से राखड़ बांध के दूसरे छोर जाने के साथ ही ग्रामीण भी खेतों की ओर जाने आवाजाही करते हैं। राखड़ को हटाने का काम शुरू हो गया है। अभी मिट्टी व रेत लाने के लिए जगह नहीं है। इसकी वजह से मरम्मत का काम प्रभावित हुआ है। अफसरों का कहना है कि मौसम साफ होने पर समस्या नहीं होगी। पानी निकासी की नाली भी टूटी
राखड़ बांध से पानी निकासी के लिए बनाई गई नाली भी टूट गई है। इसकी मरम्मत भी करनी है। अफसरों को पानी भराव की जानकारी नहीं थी। इसी वजह से यह घटना हुई। यह तो अच्छा हुआ कि तटबंध सुरक्षित है। अगर तटबंध फूटता तो आसपास गांवों में भी राखड़ पानी घुस सकता था। इसी वजह से ग्रामीण अभी भी डरे हुए हैं। अभी बोरी में मिट्टी भरकर तटबंध के नीचे हिस्से को सुरक्षित किया जा रहा है।


