श्री जैन श्वेतांबर संघ के पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन शुक्रवार को श्री जैन मंदिर डोरंडा में सुबह 7 बजे भगवान नेमिनाथ की प्रक्षाल व स्नात्र पूजा हुई। इसके बाद मुंबई से आए स्वाध्यायी हर्षिल सुरेश साह और जिनांग धीरेन साह ने प्रवचन दिया। उन्होंने वर्षभर करने योग्य 11 कर्तव्यों पर प्रकाश डाला और बताया कि इनके पालन से जीवन में आनंद, शांति और मोक्ष मार्ग की दिशा प्रशस्त होती है। कल्पसूत्र को घर ले जाकर भक्ति भावना करने वाले बोली बसंत लाल रामपुरिया, राजकुमार रामपुरिया और नवीन रामपुरिया परिवार द्वारा ली गई। भगवान नेमिनाथ की अंगी (शृंगार) श्रुति सेठिया, कृतिका रामपुरिया, पूनम बोथरा, खुशी कोठारी और काव्य कोचर द्वारा किया गया। शनिवार से भगवान महावीर की वाणी का वाचन प्रारंभ होगा। इधर, श्री दिगंबर जैन भवन में उपासिका संतोष श्रीमाल और सीमा डूंगरवाल ने प्रवचन दिया। इस अवसर पर सामायिक दिवस का आयोजन हुआ। उपासिका संतोष श्रीमाल ने 48 मिनट की अभिनव सामायिक करवाई, जिसमें परमेष्ठी वंदना, त्रिपादी वंदना, जप-ध्यान और स्वाध्याय शामिल था। उन्होंने प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभ भगवान की जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं, उपासिका सीमा डूंगरवाल ने पुनिया श्रावक की सामायिक का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सामायिक दिवस के महत्व को समझाया।


