बुरहानपुर जिले के सिलमपुरा स्थित विश्वविख्यात स्वामीनारायण मंदिर में रविवार को भगवान हरिकृष्ण महाराज देव का 155वां पाटोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुजरात, मुंबई सहित देश के कई राज्यों से संतों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर दर्शन किए। ताप्ती जल और दूध से हुआ भव्य अभिषेक पाटोत्सव के दौरान ताप्ती नदी से पवित्र जल लाकर भगवान का अभिषेक किया गया। परंपरा के अनुसार केसर, शक्कर, फलों के रस और करीब 500 लीटर दूध से भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ। इस दौरान ब्राह्मणों द्वारा वेद मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिसमें कुल 1600 मंत्रों का पाठ किया गया। मान्यता है कि इस प्रकार के अभिषेक से भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी विश्वास के चलते भक्त अपने घरों से दूध लाकर अभिषेक में शामिल करते हैं। अभिषेक के बाद कई घंटों तक दूध की निरंतर धारा बहती रही, जिसे तीर्थ के रूप में एकत्र कर श्रद्धालुओं को वितरित किया गया। भक्तों का मानना है कि यह तीर्थ कई गंभीर बीमारियों से राहत दिलाने में सहायक होता है। सुबह से उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह 5 बजे से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। यह मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय का विश्वविख्यात केंद्र है, जहां देश-विदेश से भक्त दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर का सिंहासन पूरी तरह सोने के पत्रों से निर्मित है, जो इसकी भव्यता को दर्शाता है। भजन, वाद्ययंत्र और संतों की उपस्थिति ने बढ़ाई शोभा इंदौर से आए श्रद्धालु पंकज शाह ने कहा कि 155वां पाटोत्सव देखने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। अभिषेक के दौरान प्राचीन वाद्ययंत्रों और वाजंत्री की मधुर धुन गूंजती रही। वहीं आरती के समय पारंपरिक धुनों पर आधारित इलेक्ट्रॉनिक वाद्ययंत्रों का उपयोग किया गया। इस अवसर पर 20 से अधिक संत उपस्थित रहे। शास्त्री चिन्तनप्रियदासजी स्वामी ने बताया कि पाटोत्सव से भक्तों में भक्ति, सेवा और संस्कारों की भावना मजबूत होती है।


