20 दिसंबर को दैत्य गुरु शुक्राचार्य राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। अस्त अवस्था में चल रहे शुक्र वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। इस राशि में पहले से सूर्य और मंगल की युति से अंगारक योग बना हुआ है। ऐसे में शुक्र के प्रवेश के साथ ही धनु राशि में त्रिग्रही योग का निर्माण होगा, जिसका प्रभाव केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर देखने को मिल सकता है। ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के पंचांगकर्ता एवं ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार, सूर्य-मंगल द्वारा निर्मित अंगारक योग में शुक्र का फंसना कई देशों के शासकों और सेनापतियों के लिए शुभ संकेत नहीं है। यह योग सत्ता परिवर्तन, राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर देशों के एकजुट होने जैसी परिस्थितियां बना सकता है। उन्होंने बताया कि दिसंबर माह के अंत में 29 दिसंबर को बुध के धनु राशि में प्रवेश करते ही चतुर्ग्रही योग बनेगा, जो संकट की ओर इशारा करता है। ग्रहों की यह चाल धीरे-धीरे गंभीर होती जाएगी और मार्च 2026 तक मीन राशि में पांच से छह ग्रहों का एकत्र होना बड़े स्तर पर उथल-पुथल के संकेत देता है। पंडित गौतम के अनुसार, ऐसा ही उत्पात योग वर्ष 1962 और 1971 में भी बना था, जिसके परिणामस्वरूप युद्ध और बड़े प्राकृतिक प्रकोप देखने को मिले थे। मौजूदा ग्रह स्थिति भी अशुभ संकेत दे रही है, जिससे युद्ध जैसी परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान की आशंका बनी रहेगी। मौसम पर भी इसका असर साफ दिखाई देगा। 31 दिसंबर को न्याय के देवता शनि और 2 जनवरी को व्यापारिक ग्रह बुध के उदय के साथ ही वर्ष 2026 की शुरुआत प्रतिकूल प्रभावों के साथ हो सकती है। बूंदाबांदी, अचानक बादल छाना, कोहरा और मौसम में अस्थिरता के योग बन रहे हैं। आर्थिक मोर्चे पर भी सतर्कता जरूरी है। ग्रह योगों के कारण आने वाले समय में कई देशों में रोजमर्रा की जरूरतों और खाद्य वस्तुओं की कमी से महंगाई बढ़ सकती है। ऐसे में व्यापारी वर्ग को सोच-समझकर निर्णय लेने और विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।


