2026 में 4 ग्रहण; 100 साल बाद 3 मार्च को धुलंडी पर चंद्र ग्रहण, अन्य 3 का देश में नहीं रहेगा असर

भास्कर नॉलेज साल 2026 की धुलंडी इस बार सिर्फ रंगों और गुलाल की नहीं होगी, बल्कि आकाश में घटने वाली एक दुर्लभ खगोलीय घटना की भी गवाह बनने जा रही है। इस बार 100 साल बाद होलिका दहन के दूसरे दिन धुलंडी पर 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। ग्रहण धुलंडी को दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा। ग्रहण का सूतक सूर्योदय के साथ सुबह 6:53 बजे से शुरू हो जाएगा। सनातन परंपरा में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों को ही एक अशुभ घटना के तौर पर देखा जाता है। ग्रहण काल में न तो शुभ-मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं और न ही और न ही देवी-देवताओं की पूजा की पूजा होती है। ऐसे में 16 दिन की गणगौर पूजन की स्थापना सूर्योदय से पहले ही करनी होगी। होलिका दहन की राख से बनाई जाने वाली 16 पिंडियों को सूर्योदय से पहले ही बनाकर पूजन शुरू करना होगा। जबकि, जिन घरों में धुलंडी के दिन दशा माता का डोरा लिया जाता है, उनको दूसरे दिन भाई दोज को लेना होगा। ज्योतिषाचार्य पं. दिनेश मिश्रा ने बताया कि खासतौर से नवविवाहिताएं और उद्यापन करने वाली महिलाएं 16 दिन का गणगौर पूजन करती हैं। धुलंडी के दिन सुबह गणगौर पूजन के लिए पाटा स्थापित किया जाता है। महिलाएं इस पाटे पर होलिका दहन की राख से बनाई गई 16 पिंडियों को विराजमान कर गणगौर पूजन शुरू करती हैं। धुलंडी के दिन ग्रहण होने से उसका सूतक सूर्योदय के साथ लग जाएगा। ऐसे में उसी दिन सूर्योदय से पूर्व यानी सुबह 6:53 बजे से पहले ही गणगौर का पाटा स्थापित कर पिंडियों का पूजन करना होगा। यदि कोई उस दिन पूजन शुरू नहीं कर पाए तो फिर अगले दिन से पूजा करनी होगी। हालांकि, अगले दिन करने से होलिका दहन का तीसरा दिन होने का वहम आ सकता है। पिंडिया 3:27 घंटे का होगा चंद्रग्रहण आगामी 3 मार्च धुलंडी को दोपहर 3:20 से शाम 5:33 बजे तक होने वाला यह खग्रास चंद्रग्रहण राजस्थान, गुजरात राज्यों के पश्चिम भाग के कुछ हिस्सों को छोड़कर भारत में ग्रस्तोदय (अर्थात् ग्रहण लगा हुआ चंद्रोदय होगा) के रूप में दिखाई देगा। इसमें अरूणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड व मणिपुर के कुछ भाग जहां चंद्रोदय शाम 5:33 बजे से पहले होगा, वहां चंद्रग्रहण की खग्रास स्थिति व शेष भारत में यह ग्रहण खंडग्रास स्थिति में उदय होता हुआ दिखाई देगा। {ग्रहण प्रारंभदोपहर 3 बजकर 20 मिनट {खग्रास प्रारंभदोपहर 4 बजकर 35 मिनट {ग्रहण मध्यदोपहर 5 बजकर 4 मिनट {खग्रास समाप्त शाम 5 बजकर 33 मिनट {ग्रहण समाप्तसायंकाल 6 बजकर 47 मिनट {पर्व काल3 घण्टे 27 मिनट 9 घंटे पूर्व लगता है ग्रहण का सूतक ज्योतिषाचार्य पं. रामवतार मिश्र के मुताबिक ग्रहण का सूतक 3 मार्च को सुबह सूर्योदय के साथ ही प्रारंभ हो जाएगा। सामान्यतया चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण प्रारंभ होने से 9 घंटे पूर्व माना जाता है, लेकिन ग्रहण यदि ग्रस्तोदय हो, तो शास्त्रों में पूर्ववर्ती पूरे दिन अर्थात् सूर्योदय से ही सूतक मान्य किए जाने का शास्त्रों में निर्देश मिलता है। अतः धार्मिक जनों को सूतक प्रारंभ हो जाने के बाद (बच्चों, वृद्ध व रोगियों को छोड़कर) भोजन आदि नहीं करना चाहिए। ग्रहण का ग्रह-नक्षत्र : यह चंद्रग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि में घटित हो रहा है। अतः पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि वालों के लिए विशेष कष्टप्रद रहेगा। अतः इन राशि वालों को दान, जप, पाठ करना चाहिए। -पं. दिनेश मिश्रा, ज्योतिषाचार्य नए साल में 4 ग्रहण लगेंगे, सिर्फ यही भारत में दिखेगा : नए साल 2026 में कुल 4 ग्रहण लगेंगे। इनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे। खास बात यह है कि इनमें से सिर्फ एक 3 मार्च को लगने वाला चंद्र ग्रहण ही भारत में दिखाई देगा। केवल इसी ग्रहण का सूतक काल भारत में मान्य होगा। इसके अलावा किसी ग्रहण का प्रभाव भारत पर नहीं होगा।

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