प्रतापगढ़ जिले में मकर संक्रांति पर्व को लेकर उत्साह का माहौल है। 14 जनवरी को मनाए जाने वाले इस पर्व के लिए शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बाजारों में रौनक बढ़ गई है। इस वर्ष 23 वर्षों बाद मकर संक्रांति पर विशेष संयोग बन रहा है। बाजार में उमड़ रही भीड़
बाजारों में पतंग, मांझा, डोर, खींचड़ा और तिल-गुड़ से बनी सामग्री की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। दुकानदारों ने अपनी दुकानें रंग-बिरंगी पतंगों से सजाई हैं। बच्चों और युवाओं में पतंगबाजी को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। घरों में लोगों ने की विशेष तैयारी
घरों में भी मकर संक्रांति को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। गृहणियां तिल के लड्डू, गुड़-तिल की मिठाइयां और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाने में व्यस्त हैं। खींचड़ा बनाने की परंपरा का पालन करते हुए घरों में इसकी खुशबू फैलने लगी है। सनातन संस्कृति में विशेष महत्व
सनातन धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे सूर्य का उत्तरायण कहा जाता है। इसके साथ ही खरमास (मलमास) का समापन हो जाता है और शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। धार्मिक दृष्टि से यह पर्व भगवान सूर्य की उपासना का दिन है। लोग पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं और सूर्य देव की आराधना करते हैं। सांस्कृतिक रूप से यह पर्व नई फसल के आगमन और समृद्धि का प्रतीक है। खगोलीय दृष्टि से इस दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं
देशभर में यह पर्व अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे संक्रांति, पोंगल, माघी, उत्तरायण, उत्तरायणी और खिचड़ी। केशवराय मंदिर मुख्य पुजारी श्रीहरि शुक्ल के अनुसार, इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। वैदिक पंचांग के अनुसार, पुण्यकाल दोपहर 2.49 बजे से शाम 5.45 बजे तक रहेगा, जबकि महापुण्य काल दोपहर 2.49 बजे से 3.42 बजे तक रहेगा। कुल पुण्यकाल अवधि लगभग 16 घंटे की मानी गई है। विशेष बात यह है कि 23 वर्षों बाद मकर संक्रांति पर अद्भुत संयोग बन रहे हैं। इसी दिन षटतिला एकादशी भी है। अनुराधा नक्षत्र में सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही ग्रहों की चाल से चतुर्ग्रही योग बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जा रहा है। मान्यता के अनुसार इन दिनों लोग दान पुण्य करते हैं।


