झारखंड हाईकोर्ट ने 27 साल पुराने एक हत्या के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उम्रकैद की सजा पाए पति-पत्नी को बरी कर दिया। हमीद मोमिन और उसकी पत्नी सहनाज बीबी को वर्ष 1998 में सास मेहजिन बीबी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपील पर सुनवाई करते हुए पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा। घटना 27 अक्टूबर 1995 की है। मृतका के बेटे नूर इस्लाम मोमिन ने आरोप लगाया था कि उसकी मां को उसके पिता और सौतेली मां ने पीट-पीट कर मार डाला। बेटे का कहना था कि मां ने मरने से पहले खुद आरोपियों का नाम लिया था। कोर्ट ने कहा कि बेटे और मां की गवाही आपस में मेल नहीं खाती। बेटा कहता है कि हमला करिम मोमिन की बाड़ी में हुआ, जबकि मां का बयान है कि घटना घर के सामने हुई। एफआईआर में सीने और पेट पर मारने की बात है, जबकि पोस्टमार्टम में सिर की आंतरिक चोट मौत का कारण बताई गई। छाती या पेट पर किसी प्रकार की चोट नहीं पाई गई। अदालत ने यह भी नोट किया कि घटना के बाद न तो पुलिस को सूचना दी गई, न ही किसी पंचायत को।


