राज्य के सरकारी स्कूलों में 30-30 साल से सेवाएं दे रहे करीब पौने दो लाख शिक्षाकर्मियों को नियमित तो कर दिया गया है लेकिन 15 हजार से ज्यादा शिक्षकों को पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलेगा। क्योंकि इन शिक्षकों के लिए पेंशन योजना की घोषणा 2018 में की गई और उसके बाद न्यूनतम 10 साल की नौकरी अनिवार्य की गई। यानी जो शिक्षक 2028 तक सेवा में रहेंगे उन्हीं को पेंशन की पात्रता मिलेगी। इस कड़े मापदंड के कारण पंद्रह हजार से ज्यादा शिक्षकों को पेंशन नहीं मिलेगी, क्योंकि वे 2028 के पहले ही रिटायर हो जाएंगे। हालांकि रिटायर होने वाले ज्यादातर शिक्षक 1995- 98 से सेवाएं दे रहे हैं। पड़ताल के दौरान पता चला है कि शिक्षा कर्मी से एलबी शिक्षक का दर्जा पाने वाले इन शिक्षकों का रिटायरमेंट करीब तीन-चार साल से सिलसिला शुरू हो गया है। अब तक 4 हजार से ज्यादा शिक्षक रिटायर हो चुके हैं। हजारों रुपए वेतन के रूप में पाने वाले व्याख्याता वर्ग के शिक्षकों को 95 हजार से 65 हजार तक अंतिम वेतन मिला लेकिन पेंशन की पात्रता नहीं मिली। इस वजह से रिटायरमेंट के अगले महीने से शिक्षक पूरी तरह खाली हाथ हो रहे हैं। 2028 के बाद रहेंगे नौकरी में तभी पेंशन क्योंकि न्यूनतम 10 साल की सेवा जरुरी बरसों नौकरी के बाद हाथ खाली सभी को मिले पेंशन योजना का लाभ छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से करने की मांग की है। इसके अलावा शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन योजना का लाभ मांगा गया है। यही नहीं सेवानिवृति के पश्चात मूल वेतन का 50% आजीवन पेंशन की मांग की गई है। एसोसिएशन की ओर से मुख्यमंत्री, मुख्यसचिव, सचिव वित्त विभाग, सचिव सामान्य प्रशासन विभाग छत्तीसगढ़ शासन को पत्र लिखकर 10 वर्ष की न्यूनतम सेवा में पेंशन के प्रावधान नियम में रिलेक्सेशन देते हुए 5 वर्ष की न्यूनतम सेवा में पेंशन का प्रावधान करने मांग की है। 92 हजार वेतन… जीरो पेंशन परचून की दुकान खोलनी पड़ी कांकेर के जैनुलाल राना व्याख्याता पद से रिटायर हुए। उन्हें अंतिम वेतन 92 हजार मिला। 1995 बैच के जैनुलाल को पेंशन नहीं मिल रही है। अब परिवार चलाने उन्हें परचून की दुकान खोलनी पड़ी है। उन्होंने कहा था कि पेंशन से ही शिक्षकों के सम्मान बचेगा। यही स्थिति गीता साहू की है। 18 अगस्त 1995 से प्राथमिक शाला देवक्ट्टा में पदस्थ गीता साहू को मजबूरी में कृषि कार्य करना पड़ रहा है। प्राथमिक शाला बछेराभाठा के प्रधान पाठक महेंद्र साहू को 30 साल की सेवा के बाद भी पेंशन से वंचित होना पड़ गया है। भागवत राम वर्मा की व्याख्याता के तौर पर प्रथम नियुक्ति 1995 में हुई थी।


