2015 में शहर के 95 वार्डों की 4.35 लाख से ज्यादा की रिहायशी व गैर रिहायशी प्रॉपर्टीज पर यूआईडी प्लेट लगाने का प्रोजेक्ट अधर में फंस गया है। पीएमआईडीसी द्वारा करीब 4.84 करोड़ रुपए की लागत से शहर में यूआईडी नंबर प्लेट लगाने का ठेका जिस कंपनी को सौंपा गया था, वो काम छोड़ चुकी है। वहीं, अब अब इस कार्य को दोबारा करवाने के लिए नगर निगम ने नई योजना बना ली है। निगम अब नए ड्रोन सर्वे के जरिए कार्य पूरा करेगा। ऐसे में जो कार्य पहले कुल 4.84 करोड़ रुपए में होने थे, अब सीधे 10 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत में होगा। अभी निगम अधिकारी जयपुर निगम की स्ट्डी कर रहे हैं। जनवरी में योजना का टेंडर लगाने का प्रस्ताव है। अफसर मान रहे हैं कि प्रोजेक्ट की लागत 10 करोड़ से ज्यादा होना तय है। पूर्व सर्वे बेकार, ड्रोन सर्वे से होगा फिर काम पंजाब रिमोर्ट सेंसिंग सेंटर से सर्वे, फिर नई कंपनी द्वारा किया अलग सर्वे। दोनों कंपनियों को करोड़ों रुपए निगम ने दिए। जबकि अब इन कंपनियों के सर्वे बेकार हैं। क्योंकि निगम ने 10 करोड़ रुपए वाले नए ड्रोन सर्वे का जिक्र किया है। इसी पर ज्यादा पैसे खर्च कर नया सर्वे करवाया जाएगा। उसके बाद कंपनी नए सिरे से यूआईडी नंबर प्लेट लगाएगी। कितना पैसा योजना पर हुआ खर्च 2015 से पहले पंजाब रिमोर्ट सेंसिंग सेंटर ने सर्वे किया, 1 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च। निगम ने एक अन्य कंपनी को 110 रुपए प्रति यूआईडी के हिसाब से ठेका सौंपा। जिसने 35 हजार से ज्यादा नंबर प्लेट लगाई। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत फिर 4.84 करोड़ रु. की लागत से एक कंपनी को काम सौंपा, जिसने एल्यूमीनियम की नंबर प्लेट लगानी थी। कंपनी ने 1 लाख प्रापर्टी को नंबर प्लेट लगाईं। पीएमआईडीसी की अन्य शर्तें पूरा न करने पर कंपनी ने काम बीच में ही छोड़ दिया। कंपनी को निगम 1 करोड़ रुपए से ज्यादा पेमेंट दे चुका है।


