430 बिल्डरों ने नहीं दिया ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट 700 ने छिपाई प्रोग्रेस रिपोर्ट, 10% तक जुर्माना

वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है रांची सहित राज्य के विभिन्न जिलों में बिल्डरों की मनमानी पर अब लगाम लगाने की तैयारी हो रही है। समय पर फ्लैट देने का वादा करने वाले अधिकतर बिल्डरों के प्रोजेक्ट कम से कम एक साल की देरी से चल रहे हैं। इसका खुलासा झारेरा के आंकड़ों से हुआ है। 430 बिल्डरों ने अभी तक अपने प्रोजेक्ट का कंप्लीशन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं दिया है। वहीं, करीब 700 बिल्डरों ने प्रोजेक्ट के प्रोग्रेस की तिमाही रिपोर्ट नहीं दी है। अब ऐसे बिल्डरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी हो रही है। झारेरा ने ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और तिमाही रिपोर्ट नहीं देने वाले बिल्डरों को रिपोर्ट जमा करने का अंतिम मौका दिया है। इसके लिए झारेरा के पोर्टल को 30 जनवरी तक के लिए खोला गया है। निर्धारित अवधि में 1 अक्टूबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक की तिमाही रिपोर्ट को अपलोड करना होगा। कोई तकनीकी समस्या आती है तो झारेरा कार्यालय में जाकर इसे दूर किया जा सकता है। क्योंकि, तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए टे​िक्नकल लोगों की टीम बनाई गई है। निर्धारित समय पर रिपोर्ट जमा नहीं करने वाले बिल्डरों के खिलाफ झारेरा केस दर्ज करेगा। ऐसे बिल्डरों पर प्रोजेक्ट कॉस्ट का 10% तक जुर्माना लगाने की तैयारी की जा रही है। एक्सपर्ट व्यू… ​िबना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट फ्लैट हैंडओवर नहीं होगा आर्किटेक्ट, सुजीत भगत के मुताबिक बहुमंजिले भवनों के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के बिना खरीदारों को फ्लैट हैंडओवर नहीं करने का नियम है। क्योंकि, बिल्डिंग का निर्माण नक्शा के अनुरूप हुआ है या नहीं और फ्लैट लोगों के रहने के लायक है या नहीं, यह ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट से तय होता है। इसलिए बिल्डर द्वारा कंप्लीशन सर्टिफिकेट जमा किया जाता है। नक्शा के अनुसार नहीं बन रही बिल्डिंग, इसलिए नहीं लेते ऑक्यूपेंसी झारेरा में रजिस्टर्ड करीब 400 पुराने प्रोजेक्ट का ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जमा नहीं हुआ है। इसके पीछे बिल्डरों का तर्क है कि नगर निगम से ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं मिलता है। लेकिन जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि 80 प्रतिशत प्रोजेक्ट ऐसे हैं जिसका निर्माण स्वीकृत नक्शा के अनुरूप नहीं होता है। इस वजह से बिल्डर नगर निगम में कंप्लीशन सर्टिफिकेट जमा नहीं करते हैं। इसलिए निगम भी ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं करता है। तिमाही रिपोर्ट नहीं देने का सीधा असर फ्लैट खरीदारों पर झारेरा की वेबसाइट पर सभी बिल्डरों को रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट की तिमाही प्रगति रिपोर्ट और खर्च का ब्योरा अपडेट करना अनिवार्य है। खर्च के अनुसार प्रोजेक्ट की रफ्तार नहीं है, मतलब बिल्डर फंड को डायवर्ट कर रहा है। जिसके कारण प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हो सकता। इसका खामियाजा फ्लैट खरीदारों को भुगतना पड़ेगा। क्योंकि, उन्हें निर्धारित समय पर फ्लैट नहीं मिलेगा। झारेरा के अनुसार, अभी तक मात्र 26 प्रोजेक्ट की रिपोर्ट ही अपडेट हुई है। तिमाही रिपोर्ट नहीं देने वाले बिल्डरों पर प्रति तिमाही 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगता है।

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