मां की मौत के बाद भूखा-प्यासा 5 दिन का ऊंट उसके पास ही बैठा रहा। बार-बार सिर से मां को उठाने की कोशिश करता और फिर अपनी जगह पर आकर बैठ जाता। जंगली जानवरों और कुत्तों से हमले से बच्चा घायल भी हुआ था, लेकिन वह अपनी मां को छोड़कर नहीं गया। यहां से गुजर रहे राहगीरों ने जब उसे देखा तो गोशाला में इसकी सूचना दी। इसके बाद गोशाला से पिकअप आई और उसे सुरक्षित ले गई। इस दौरान ऊंट का बच्चा आवाजें निकाल कर रोता रहा और मां को पुकारता रहा। इस घटना का वीडियो सामने आया है। मामला जैसलमेर के सोढाकोर से 3 किमी दूर स्थित जंगल की है। चरवाहों ने दी थी सूचना जगदंबा सेवा समिति ट्रस्ट के सचिव जुगल किशोर आसेरा ने बताया- ओरण क्षेत्र में घूम रहे चरवाहों ने बच्चे की चीख पुकार सुनकर इसकी सूचना सोढाकोर के ग्रामीणों को दी थी। गांव के भवानीसिंह भाटी, हिन्दूसिंह भाटी और सांगसिंह भाटी ने इस दर्दनाक घटना की जानकारी हमारे ट्रस्ट को दी। सूचना मिलते ही भादरिया गौशाला से जुड़ी टीम सक्रिय हुई। ऐसे में, यहां टीम भेजी और उसका रेस्क्यू करवाया। प्रसव पीड़ा और कमजोरी से ऊंटनी की मौत आसेरा ने बताया- एक ऊंटनी ने बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के दौरान अत्यधिक पीड़ा और कमजोरी के चलते ऊंटनी ने दम तोड़ दिया। जन्म लेते ही मां का साया सिर से उठ जाने का दर्द शायद नन्हे ऊंट के बच्चे ने भी महसूस किया। वह लगातार मां के पास ही रहा और उसके शरीर से लिपटकर बैठा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे की आंखों से आंसू टपक रहे थे। वह अपनी मां को छोड़ कर जाने को तैयार नहीं था। अकेले ऊंट को कुत्तों ने नोचा आसेरा ने बताया- मां की मौत के अगले ही दिन उस मासूम बच्चे पर कुत्तो ने हमला भी किया था। ऊंट के बच्चे की पीठ पर चोट का निशान भी है। शरीर पर कई जगह जख्म हो गए, लेकिन इसके बावजूद वह बच्चा अपनी मां को छोड़कर कहीं नहीं गया। घायल हालत में भी वह पांच दिनों तक बिना कुछ खाए-पिए अपनी मृत मां के पास बैठा रहा। कभी वह उसके चारों ओर चक्कर लगाता, तो कभी सिर से धक्का देकर उसे उठाने का प्रयास करता, जैसे उम्मीद हो कि मां फिर से खड़ी हो जाएगी। चरवाहों के अनुसार, बच्चा कई दिन तक भूख से तड़पता रहा, उनसे जितना हो सका उन्होंने उसे बचाने की कोशिश की। लेकिन, बच्चे को मां से अलग कर ले नहीं जा सकते थे। इसके बाद ट्रस्ट को फोन किया। जगदंबा सेवा समिति ट्रस्ट के सचिव जुगलकिशोर आसेरा ने बताया कि सूचना मिलते ही गोशाला के गोरक्षक गोपालसिंह भाटी, दिनेशसिंह देवड़ा, थानाराम भील सहित अन्य कार्मिक मौके पर पहुंचे। टीम ने देखा कि ऊंटनी का बच्चा गंभीर रूप से घायल है और बेहद कमजोर हो चुका है। उसके शरीर पर कुत्तों के काटने के निशान थे और वह चलने में भी असमर्थ हो रहा था। रेस्क्यू कर गौशाला लाया गया बच्चा गौशाला टीम ने तत्काल घायल ऊंट के बच्चे को रेस्क्यू किया। हालांकि बच्चे को मां से अलग करना आसान नहीं था। टीम के अनुसार जब उसे वहां से ले जाने का प्रयास किया गया तो वह बार-बार अपनी मां की ओर लौटने की कोशिश करता रहा। काफी मशक्कत और सावधानी के बाद उसे वाहन में बैठाकर भादरिया गौशाला लाया गया। यहां पहुंचते ही उसका प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। गौशाला में पशु चिकित्सकों की देखरेख में बच्चे के जख्मों का इलाज किया गया। उसे दवाइयां दी गईं और पोषणयुक्त आहार शुरू किया गया। गोरक्षकों का कहना है कि बच्चा अभी भी मानसिक रूप से सदमे में है। वह बार-बार चिल्लाता है और बेचैन रहता है, जैसे अपनी मां को ढूंढ रहा हो। हालांकि इलाज के बाद उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।


