9.75 करोड़ से खैरबना-कांदुल 3 किमी सड़क बनेगी पक्की, स्वीकृति का इंतजार

भास्कर न्यूज | बालोद गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम खैरबना से कांदुल तक 3 किमी सड़क को डामरीकरण कराने पीडब्ल्यूडी ने शासन को 9.75 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा है। जिस पर अब तक मंजूरी नहीं मिल पाई है। जिसे ध्यान में रखकर ग्रामीणों ने प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के पहले सड़क में मुरुम बिछाकर मरम्मत कार्य कराने की मांग की है, ताकि आने-जाने में सहूलियत हो सकें। इस सड़क को संवारने दो गांव खैरबना व कांदुल के ग्रामीणांे ने 18 अगस्त को सुबह 7.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक 5 घंटे गुंडरदेही-अर्जुंदा मुख्य मार्ग पर स्थित कांदुल में चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया था। जिसके बाद आनन फानन में दो हाईवा में मुरुम मंगाकर सड़क में डलवाया गया था। प्रशांत ठाकुर ने बताया कि चक्काजाम समाप्त होने के बाद अफसरों व जनप्रतिनिधियों ने जल्द सड़क को संवारने का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक कुछ नहीं हो पाया है। जनवरी तक ऐसी ही स्थिति रही तो फरवरी में आंदोलन करने विचार कर रहें है। आजादी के बाद से अब तक सड़क कच्ची होने से लोगों को परेशानी हो रही है। पीडब्ल्यूडी के एसडीओ एम. गोस्वामी ने बताया कि सड़क को संवारने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज चुके हैं। प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरू होगा। गड्‌ढे: जान जोखिम में डाल सफर करने की मजबूरी मुरली यादव, पप्पू यादव, चमेली मंडावी, महाबती, रामप्यारी मंडावी, महावीर मंडावी, बसंत मंडावी, लीलाधर ने बताया कि सड़क खराब व गड्‌ढें होने की वजह से रात में जान जोखिम में डालकर सफर करने मजबूर है। सड़क का डामरीकरण होने के बाद ही राहत मिल पाएगी। आंदोलन करने के बाद अफसरों ने आश्वासन दिया था लेकिन अब तक सड़क की स्थिति जस की तस है। इस वजह से परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। खोमेश्वरी देशमुख, टोमिन मंडावी, श्याम मंडावी, खोरबाहरा मंडावी, श्याम लाल मंडावी, निरंजन देशमुख, खुशबु नेताम, भावना मंडावी, सुखदेव टेकाम, खेमलाल हिरवानी ने बताया कि कई साल से सड़क को संवारने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि परेशानी बढ़ रही है। सीमा टेकाम, लीलाधर मंडावी, गोपाल भार्गव, सुनील निषाद ने बताया कि सड़क खराब होने से अर्जुंदा, कांदुल पहुंचने में परेशानी हो रही है। हितेश सिन्हा, तीरथ सिन्हा, नोहर ठाकुर ने बताया कि सड़क की स्थिति जस की तस रहने पर आगे आंदोलन करने की चेतावनी दे चुके है बावजूद अब तक सड़क को संवारने कोई ध्यान नहीं दे रहें है। इस मार्ग से स्कूल, कॉलेज के छात्र आना-जाना करते है। सोसायटी व खेत होने से किसानों को भी इसी मार्ग का सहारा लेना पड़ता है। डामरीकरण होने से राहत मिल पाएगी। विभाग के अफसरों के अलावा जनप्रतिनिधियों को ध्यान देने की जरूरत है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *